देशद्रोह के कलंक से मुक्त हुए पांच परिवार

लखनऊ। देशद्रोह के आरोप में फंसे पांच लोग और उनके परिवार के लिए गुरुवार का दिन खुशियों भरा रहा। देशद्रोह और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने के इन सभी आरोपियों को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। एटीएस के विशेष न्यायाधीश एसएएच रिजवी ने शेख मुख्तार हुसैन, नौशाद उर्फ हाफिज उर्फ साबिर, नूर इस्लाम उर्फ मामा, मो. अली अकबर हुसैन व अजीजुर्रहमान उर्फ सरदार को रिहा करने का आदेश दिया। नूर इस्लाम को छोड़कर सभी आरोपी देर शाम जेल से रिहा कर दिए गए। नूर इस्लाम को आतंक के एक अन्य मामले में निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उसने उच्च अदालत में अपील दायर की हुई है।

देशद्रोह से जुड़े बयान मेल नहीं खाते

कोर्ट के अनुसार अभियोजन ने जो गवाह पेश किए, उनके बयानों में काफी भिन्नताएं हैं और यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि घटना किस प्रकार हुई। कोर्ट ने कहा, किसी गवाह ने 2-4 मिनट नारेबाजी करना बताया जबकि अन्य गवाहों ने 5-10 मिनट तक नारेबाजी का बयान दिया है। वहीं, वादी ने अपने बयान में बताया कि 2-4 मिनट ही नारेबाजी हुई। कोर्ट ने कहा कि घटनास्थल के बारे में भी गवाहों के बयान अलग-अलग हैं। कुछ गवाहों ने पूरी घटना कोर्ट रूम में होना बताया, जबकि कुछ ने आरोपियों केजेल गाड़ी से उतरने केस्थान से शुरू होकर कोर्ट केबरामदे तक बताया है।

कोर्ट ने अपने आदेश में तत्कालीन एडीजे शक्तिकांत की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 12 अगस्त 2008 को कोर्ट में जलालुद्दीन व अन्य के मामले की सुनवाई होनी थी। भोजनावकाश के दौरान आरोपियों को पुलिस कस्टडी में लाया गया। बताया गया कि न्यायाधीश अपने विश्राम कक्ष में थे, तभी उन्हें शोरगुल सुनाई दिया। वह कोर्ट में पहुंचे तो देखा कि कोर्ट रूम में वकीलों के दो गुट झगड़ रहे थे। पूछने पर पता चला कि एक गुट कह रहा था कि बार ने आतंकियों व राष्ट्र विरोधी तत्वों की कोर्ट में पैरवी करने पर रोक लगा रखी है जबकि दूसरा पक्ष आरोपियों की पैरवी करना चाह रहा था।

यह था पूरा मामला

दरोगा रामनरायन सिंह ने वजीरगंज थाने में 12 अगस्त 2008 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह पुलिस बल के साथ देशद्रोह के आरोपियों को जिला जेल से लेकर एडीजे की कोर्ट में पेशी पर आए थे। वह दोपहर करीब डेढ़ बजे शेख मुख्तार हुसैन,अली अकबर हुसैन, अजीजुर्रहमान, नौशाद व नूर इस्लाम को लेकर कोर्ट के सामने पहुंचे। वहां आरोपियों के वकील एमएफ फरीदी व मो. शोएब दो अन्य वकीलों के साथ मिले। फरीदी ने आरोपियों के कान में कुछ कहा। इस पर इन लोगों ने भारत विरोधी व पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने शुरू कर दिए।सुरक्षा घेरा सख्त होने के बावजूद वकील फरीदी व उनके साथी आरोपियों को उकसाते रहे। इस बीच कोर्ट के आसपास तमाम लोग व वकील जुट गए तथा नारों का विरोध करने लगे। लोगों में अशांति फैलने की आशंका के चलते उनकी पेशी कराकर वापस जेल पहुंचाया गया।

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