नमन वर्मा मर्डर मिस्‍ट्री की हो उच्‍चस्‍तरीय जांच, लोगों ने किया प्रदर्शन

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लखनऊ। फाइव स्‍टार होटल के एक्‍जक्‍यूटिव नमन वर्मा के हत्‍यारों को पकड़ने की मांग को लेकर क्षत्रिय स्‍वर्णकार एकता महासभा व एकता विकास व्‍यापार मंडल के बैनर तले आज लोग फिर सड़कों पर उतरे। जीपीओ पर हुए शांतिपूर्वक धरने के दौरान हत्‍याकांड को लेकर लोगों में आक्रोश साफ-साफ दिखा। पुलिस के निष्क्रिय रवैये पर असंतोष व्‍यक्‍त करते हुए नमन के माता-पिता ने कहा कि लगभग दो महीने बाद भी राजधानी पुलिस के हाथ खाली हैं।

नमन वर्मा नमन वर्मा हत्‍याकांड की उच्‍चस्‍तरीय जांच कराएं मुख्‍यमंत्री

पिता महेंद्र वर्मा ने कहा कि हमारा बेटा नमन वर्मा तो चला गया लेकिन उसके हत्‍यारे यदि कानून के शिकंजे से बाहर खुले में घूमते रहे तो उसकी आत्‍मा को शांति नहीं मिलेगी। हम लोगों की जिंदगी का आखिरी मकसद अब नमन के हत्‍यारों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने का है। नमन वर्मा के परिजनों ने यह भी मांग की कि हमें मुख्‍यमंत्री से मिलने दिया जाय ताकि उनसे मिलकर हम इस हत्‍याकांड की उच्‍चस्‍तरीय जांच करवाने की गुजारिश कर सकें क्‍योंकि लगता है राजधानी पुलिस हत्‍याकांड का पर्दाफाश नहीं कर पाएगी।  राष्‍ट्रीय स्‍वर्ण व्‍यवसाई महासभा के प्रदेश महासचिव विजय प्रकाश रस्‍तोगी ने कहा कि नमन वर्मा के हत्‍यारों को यदि जल्‍द से जल्‍द गिरफ्तार नहीं किया गया तो एक बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।

 18 नवंबर 2015 को की गई थी नमन की हत्‍या

गौरतलब है कि स्‍थानीय होटल रेनेसां में असिस्‍टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत नमन वर्मा की 18 नवंबर 2015 की रात लगभग दस बजे अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्‍या कर दी थी। मीडिया सहित पुलिस प्रशासन व आमजन को हिला देने वाले इस हत्‍याकांड से लखनऊ वासी हतप्रभ थे क्‍योंकि नमन वर्मा एक सीधा-सादा नौजवान था। लखनऊ के आम नागरिकों ने इस हत्‍याकांड से स्‍वयं  जोड़ते हुए नमन वर्मा को इंसाफ दिलाने सड़कों पर भी उतरे लेकिन नतीजा अभी तक सिफर ही रहा। पहले तो विभूतिखंड पुलिस इसे एक दुर्घटना बताती रही। जब पोस्‍मार्टम की रिपोर्ट में गोली मारने की बात सामने आई तब जाकर पुलिस ने हत्‍या का मामला दर्ज किया। उसके बाद भी पुलिस ने मामले में कोई खास प्रगति नहीं की।

नमन वर्मा

लखनऊ से दिल्‍ली और लुधियाना की दौड़ भी बेकार ही रही। कुल मिलाकर लखनऊ पुलिस ने मामले को रफा दफा करने का ही प्रयास किया जबकि प्रशासन के ऊपर आम नागरिकों के अलावा कई व्‍यापारिक संगठनों व मीडिया का भी दबाव था।

 

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