नर्सरी ऐडमिशन : प्राइवेट स्कूलों से सरकार ने की बैठक, LG को भेजेंगे सुझावों की फाइल

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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने नर्सरी ऐडमिशन के मामले में प्राइवेट स्कूलों के साथ मीटिंग की है। इस मीटिंग में उन 298 स्कूलों से चर्चा की गई, जिनमें ऐडमिशन प्रोसेस को सरकार ने बंद कर रखा है। प्राइवेट स्कूलों के साथ हुई इस मीटिंग में स्कूलों के सुझाव और प्वाइंट की फाइल को एलजी के पास भेज दी गई है। जल्द ही इससे संबंधित गाइडलांइस की जाएगी।

नर्सरी ऐडमिशन

नर्सरी ऐडमिशन मामले में सरकार ने उठाए कदम

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली सचिवालय में हुई इस मीटिंग में एजुकेशन डायरेक्टर, सेक्रेटरी समेत अनऐडेड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल की ऐक्शन कमेटी के सदस्य मौजूद रहे। ऐक्शन कमेटी के प्रेसिडेंट एसके भट्टाचार्य ने बताया कि सरकार की ओर से लैंड अलॉटमेंट की शर्त को उठाया गया लेकिन हमने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कोट किया, जिसके तहत 25 प्रतिशत सीटें ईडब्ल्यूएस कैटिगरी को दी जाएंगी और बाकी की 75 प्रतिशत सीटों को ट्रांसपैरेंट तरीके से रेग्यूलेट करने का अधिकार स्कूल के पास होगा।

उन्होंने कहा कि डीएसईएआर 1973 में भी इसका जिक्र है कि स्कूल ऐडमिशन क्राइटेरिया तय कर सकते है। महज अलॉटमेंट लेटर कोर्ट के फैसले को रूल नहीं कर सकता। भट्टाचार्य ने कहा कि एजुकेशन डायरेक्टर ने सारी बातें सुनीं और कि एलजी तक इसे जल्द ही पहुंचा दिया जाएगा। इसके बाद गाइडलाइंस पर फैसला लिया जाएगा। डीडीए समेत बाकी सरकारी डिपार्टमेंट से इस शर्त पर काफी सस्ते दामों में जमीन दी है कि उन्हें पड़ोस के बच्चों की ऐडमिशन में प्रायॉरिटी देनी होगी।

मीटिंग में लैंड अलॉटमेंट लेटर पर लिखी इस शर्त को लेकर सरकार ने मिनिमम 1 किलोमीटर की दूरी रखकर ऐडमिशन देने की बात की, तो स्कूलों ने सुप्रीम और हाई कोर्ट के ऑर्डर का जिक्र करते हुए कहा कि स्कूलों को क्राइटेरिया तय करने का अधिकार दिया गया है और उसमें सरकार दखल नहीं दे सकती।

एलजी से करी शिकायत

दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल्स मैनेजमेंट असोसिएशन की ओर से बुधवार को एलजी के नाम एक लेटर भेजी गई। इसमें शिकायत की गई है कि इस मीटिंग में उनके प्रतिनिधि नहीं बुलाए गए, जबकि असेासिएशन से करीब चार हजार स्कूल जुड़े हैं। 298 स्कूलों की लिस्ट में भी इससे जुड़े स्कूल हैं। असोसिएशन के प्रेजिडेंट आर. सी. जैन ने कहा कि इस मीटिंग में न उनका और न ही एलजी का ओर कोई प्रतिनिधि था।

Edited by- Jitendra Nishad

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