वह इलाज के लिये तड़पा, फिर भी नहीं पसीजे कलयुगी ‘भगवान’

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गोरखपुर। डॉक्टर और पैरामेडिकल की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि कोई भी मरीज इलाज के अभाव में दम न तोड़ने पाये, लेकिन गोरखपुर में न सिर्फ नैतिकता तार- तार हुई बल्कि ‘भगवान’ खुद हैवान बन गए और टिटनेस के शिकार नवजात बच्चे का इलाज करने से मना कर दिया। जिसके चलते बच्चे ने बीआरडी मेडिकल कालेज गेट पर ही तड़प- तड़प कर दम तोड़ दिया। कालेज के ट्रामा सेंटर में उपलब्ध मेडिकल टीम ने बच्चे को भर्ती करने से इनकार कर दिया था।

हैवानियत का यह मामला स्थानीय मीडिया की सुर्खियों में आने के बाद कालेज प्रशासन से जुड़े अफसर बगले झांक रहे हैं। अब जांच के नाम पर खानापूर्ति की तैयारी है। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि कालेज में टिटनेस पीड़ित बच्चों के इलाज की सुविधा है। पहले भी इलाज होता रहा है। ऐसे में मरीज को मना करने का कोई तुक ही नहीं बनता।

नवजात

सीरियस मामलों में मनाही की आदत

 

बीआरडी मेडिकल कालेज में जिला अस्पताल जैसी रेफर और मनाही की प्रवृत्ति आ गई है। परतावल बाजार के शेषमणि ने बताया कि उनके परिवार की एक महिला के पेट में बच्चे ने दम तोड़ दिया। जब आपरेशन के लिये बीआरडी ले जाया गया तो वहां केस लेने से इनकार कर दिया गया। उन्हें निजी अस्पताल ले जाना पड़ा।

नवजात बहराइच से आया था

 

बहराइच जिले के नानपारा निवासी शब्बीर की पत्नी शबाना ने शुक्रवार को बच्चे को जन्म दिया था। बाद में बच्चे को टिटनेस हो गया तो फौरन बीआरडी रेफर कर दिया गया। बड़ी उम्मीद से यह दम्पत्ति बीआरडी आया लेकिन यहां इलाज करने से ही मना कर दिया गया। बच्चे के मां- बाप ने डाक्टर से गुजारिश भी की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वे बच्चे को प्राइवेट अस्पताल ले जाने की तैयारी में थे कि नवजात ने दम तोड़ दिया।

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