आकाशवाणी ने किया आवाज के जादू से लोगों को मंत्रमुग्ध

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लखनऊ।  लखनऊ लिटरेचर फेस्टिवल 2016 में शनिवार को हिन्दी वांग्मय निधि की ‘हमारा लखनऊ पुस्तकमाला’ श्रंखला के 41वें पुष्प लखनऊ का आकाशवाणी का विमोचन किया गया। यह विमोचन  सुप्रसिद्ध साहित्यकार नवीन जोशी, आकाशवाणी के भीष्म पितामह यज्ञदेव पण्डित, बेगम अख्तर की शिष्या सुनीता झिंगरन, हिन्दी वांग्मय निधि के अध्यक्ष प्रो0शैलेन्द्र नाथ कपूर और संपादक राम किशोर बाजपेयी के कर-कमलों से हुआ। लेखक नवनीत मिश्र आकाशवाणी के ख्यातिलब्ध  समाचार वाचक  रहे हैं।

नवनीत मिश्र

नवनीत मिश्र ने बताया- स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले का है लखनऊ का आकाशवाणी 

नवनीत मिश्र के उद्बोधन के पूर्व आकाशवाणी की सिग्नेचर ट्यून बज रही थी और उन्होंने बोलना शुरू किया कि मीडियम और शार्ट वेव पर यह आकाशवाणी का लखनऊ केंद्र है। दर्शकों ने ताली बजा कर उनका स्वागत किया। उन्होंने यज्ञदेव पंडित को आवाज़ का पैगम्बर बताया।

नवनीत मिश्र ने अपने बारे में बताया कि उन्होंने 1965 में रामपुर रेडियो स्टेशन में नौकरी शुरू की। पहले दिन ही सिग्नेचर ट्यून बजा कर बंद करना भूल गए। उनके सीनियर रज्जन लाल जी ने टोका तो बोले अरे मैं भूल गया, और यह बात भी प्रसारित हो गई।  उन्होंने बताया कि लखनऊ का आकाशवाणी केंद्र न केवल स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले का है बल्कि बेग़म अख़्तर, बिस्मिल्लाह ख़ाँ, अल्ला रक्खा, शिव कुमार शर्मा, हरी प्रसाद चौरसिया, कुमार गन्धर्व जैसे महान कलाकारों की कर्मस्थली रहा है।

सुविख्यात गायिका सुनीता झिंगरन ने बताया कि उनकी माँ भक्ति संगीत के पुरोधा हरिदास जी की वंशज थीं और उनके घर में भक्ति रस की अबाध धरा बहती रही है। उन्होंने सुर साम्राज्ञी बेगम अख्तर के बारे में कुछ बहुत अंतरंग किस्से सुनाये। बोलन लागी कोयलिया, मन मोरा झूलन लागा। गा कर उन्होंने श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। स्वरों के आरोह अवरोह से कोयल की आवाज निकाल कर उन्होंने अपनी अद्भुत प्रतिभा का परिचय दिया।

1949 में आल इंडिया रेडियो में कैजुअल आर्टिस्ट के रूप में नौकरी शुरू करने वाले यज्ञ देव पंडित जी ने बताया कि उस ज़माने में बहुत अच्छा काम करने वाले आर्टिस्ट को 10 रुपये की वेतन वृद्धि मिलती थी। उन्होंने यह भी बताया कि लखनऊ के आकाशवाणी ने पहली बार आवाज के तिलस्म/जादू को श्रोताओं के सामने लाने की पहल की।

बन्द स्टूडियो में आवाज़ का जादू बिखरने वाले खुले आसमान के नीचे मंच पर आये तो लोगों ने पहली बार लोकप्रिय रेडियो कलाकारों रमई काका, दीदी, बल संघ के कलाकारों, समाचार वाचकों को रुहबरु देखा और सुना। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नवीन जोशी ने एक ज़माने तक रेडियो की लोकप्रियता के बारे में कुछ रोचक तथ्य साझा किए। नवनीत मिश्र द्वारा लिखी लखनऊ का आकाशवाणी पुस्तक की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इस पुस्तक से आकाशवाणी के इतिहास और उसके कलाकारों के विषय में पाठकों को बहुत रोचक जानकारी मिलेगी।

कार्यक्रम का संचालन सुषमा गुप्ता ने किया जो स्वयं आकाशवाणी की वरिष्ठ अधिकारी रहीं हैं। अंत में हिन्दी वांग्मय निधि के अध्यक्ष प्रो0 शैलेन्द्र नाथ कपूर ने बताया कि शीघ्र ही हमारा लखनऊ पुस्तकमाला में लखनऊ का आर्यसमाज पुस्तक पाठकों के सामने आएगी। उन्होंने अतिथियों के प्रति धन्यवाद् ज्ञापित किया और निधि के शैलेन्द्र द्विवेदी और मनीष अवस्थी के योगदान की सराहना की।

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