नवरात्र में यहां आने से पूरी होती हैं मुरादें

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देहरादून। उत्तराखंड में कई धर्मिक स्थल हैं। इसीलिए इसे देवभूमि भी कहा जाता है। खासकर नवरात्र में यहां भक्तों का तांता लग जाता है। 108 सिद्घ पीठों में से एक मां पूर्णागिरी मंदिर टनकपुर से 21 किमी दूर है। स्थानीय लोगों ने बताया कि मुराद पूरी होने पर यहां कुछ भक्तों द्वारा यहां जीभ काटकर चढ़ाई गई।

नवरात्र

नवरात्र में बड़ी संख्या में आते हैं भक्त

विशेष रूप से मार्च के महीने में चैत्र नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में यहां भक्त आते हैं। हर साल यहां भक्तों के आने का सिलसिला लगा रहता है। चैत्र नवरात्र से शुरू होने वाला मां पूर्णागिरी का यह मेला जून माह तक चलता है।

मंदिर में पहुंचने के लिए टैक्सी द्वारा ठूलीगाड़ जाते हैं। जहां से मां पूर्णागिरी की पैदल यात्रा शुरू हो जाती है। ठूलीगाड़ से कुछ दूर हनुमान चट्टी पड़ता है। यहां आपको अस्थायी दुकान और आवासीय झोपड़ियां दिखाई देंगी। फिर तीन किमी. की चढ़ाई चढ़ने के बाद आप पूर्णागिरी मंदिर पहुंच जाएंगे। जहां से आप टनकपुर की बस्ती और कुछ नेपाली गांवों देख सकते हैं। यहां से काली नदी को भी ऊंचाई से देखा जा सकता है।

मां पूर्णागिरी की पूजा के बाद लोग भी उसके वफादार भक्त ब्रह्म देव और नेपाल में स्थित सिद्घनाथ की पूजा करते हैं। उनकी पूजा किए बिना मां पूर्णागिरी के दर्शन पूरे नहीं माने जाते हैं।

 

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