नवरात्र में यहां होती है विशेष पूजा, शामिल होने पर पूरी होती हैं मुरादें

0

देहरादून। उत्तराखंड के देवलगढ़ में मां राजराजेश्वरी का पवित्र धाम स्थित है। यह मंदिर भक्तों के लिए हमेशा खुला रहता है। यहां नवरात्र के अवसर पर विशेष पूजा की जा सकती है। बताया जाता है कि इस विशेष पूजा में शामिल होते ही सभी मुरादें पूरी होती हैं।

नवरात्र

नवरात्र और बैसाखी में यहां आयोजित होता है मेला

यहां नवरात्र और बैसाखी के दौरान यहां खास तरह के मेले का आयोजन किया जाता है। दस महाविद्याओं में तृतीय महाविद्या षोढषी को मां राजराजेश्वरी कहा जाता है। मां राजराजेश्वरी को महात्रिपुरा सुंदरी, कामेशी, ललिता, त्रिपुर भैरवी आदि नामों से भी पुकारा जाता है। मां को वेदों और तंत्र शास्त्रों में योग, ऐश्वर्य व मोक्ष की देवी माना जाता है।

मां राजराजेश्वरी मंदिर के मुख्य पुजारी कुंजिका प्रसाद उनियाल बताते हैं कि मां राजरोजश्वरी में भक्तों की बड़ी आस्था है। मां अपने भक्तों व श्रद्धालुओं को धनधान्य से भर देती है। चैत्र व शारदीय नवरात्रों में मां की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

मां राजराजेश्वरी मंदिर देवलगढ़ भक्तों, श्रद्धालुओं के लिए बारामास खुला रहता है। मां के मंदिर के कपाट देवी स्नान, आरती-पूजा अर्चना के साथ ब्रह्ममुहूर्त में ही श्रृद्धालुओं के लिए खुल जाते हैं। शाम साढ़े सात बजे विधि विधान से पूजा के साथ कपाट बंद कर दिए जाने हैं, लेकिन नवरात्रों में मंदिर में विशेष हवन किया जाता है।

मां राजराजेश्वरी मंदिर का पूरा इतिहास

14 वीं शताब्दी में देवलगढ़ के सिद्धपीठ मां राजराजेश्वरी की स्थापना 1512 में गढ़वाल नरेश राजा अजयपाल ने की थी। उन्होंने मां के मंदिर में उन्नत श्रीयंत्र स्थापित किया था। मां राजराजेश्वरी के तीन मंजिला मंदिर में राजा ने सबसे ऊपरी कक्ष में श्रीयंत्र, महिष मर्दिनी यंत्र, कामेश्वरी यंत्र, मूर्तियां व बरामदे में बटुक भैरव की स्थापना की है। साथ ही मंदिर में भगवान बदरीनाथ की डोली, केदारनाथ की डोली, दक्षिण काली की डोली, शिवलिंग भी स्थापित है।

 

loading...
शेयर करें