प्राइवेट बैकों के ट्रांजैक्शन चार्ज से परेशान हुए ग्राहक, लुभाने में जुटे कोऑपरेटिव बैंक

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मुंबई। कैशलेस ट्रांजैक्शन बढ़ाने के लिए निजी बैंकों का ट्रांजैक्शन चार्ज के नाम पर पैसा वसूलना लोगो की आँख में धूल झोंकने जैसा है। निजी बैंकों ने जनता की जेब से पैसा निकालने की एक चाल चली है। महाराष्ट्र कोआपरेटिव बैंक्स फेडरेशन के अध्यक्ष विद्याधर अनास्कर का मानना है कि देश के मजबूत कॉआपरेटिव बैंकों के लिए यह सुनहरा मौका है वह अपना ग्राहक बेस मजबूत करें।

निजी बैंकों का ट्रांजैक्शन चार्ज

निजी बैंकों का ट्रांजैक्शन चार्ज पड़ रहा लोगों पर भारी

महाराष्ट्र कोआपरेटिव बैंक्स फेडरेशन के अध्यक्ष विद्याधर अनास्कर ने इसे निजी बैंकों की एक साजिश कहा है। उनके मुताबिक निजी बैंकों की घोषणा कि चार ट्रांजैक्शन के बाद ग्राहकों को प्रत्येक ट्रांजैक्शन के लिए 150 रुपये देने होंगे पूरी तरह से गलत है। अनास्कर के मुताबिक निजी बैंक ऐसे छिपे चार्जेस के भरोसे ही मुनाफा कमाती है।

निजी बैंकों के फैसले से सभी लोग नाराज

अनास्कर के मुताबिक निजी बैंकों के इस फैसले से आम जनता कैशलेस होने के बजाए दी हुई लिमिट के अंदर पर्याप्त कैश निकालने लगेंगे और उनके लिए कैश रखना ही फायदे का सौदा रहेगा। चार ट्रांसेक्शन के बाद डेढ़ सौ रूपए का चार्ज सिर्फ प्राइवेट बैंक्स ने तय किया है। इस निर्णय में सरकार का कोई रोल नहीं है। सरकारी बैंकों ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है। और न ही कोऑपरेटिव बैंकों का इस फैसले से कोई लेनादेना है।

प्राइवेट बैंकों की अपनी है थ्‍योरी

निजी बैंकों का कहना है कि ये फैसला कैशलेस ट्रांजैक्शन बढ़ाने के लिए लिया है लेकिन इसमें लोगों की जेब से पैसे निकालने की साजिश है। लोग अब बैंक में पैसे जमा करने से बचेंगे और बैंक से ज्यादा से ज्यादा कैश निकालने का चलन बढेगा। अगर किसी को सौ रुपये की जरुरत है तो भी एक से दो हजार रुपये निकालना शुरू करेंगे।

मुनाफाखोरी वाली सोच

निजी बैंक की ग्राहकों की जेब से पैसा निकालकर अपना मुनाफा बढ़ाने वाली सोच है। निजी बैंक की ये छिपी साहूकारी है। इससे इनका बड़ा मुनाफा होगा। निजी बैंक के चार्जेस देखे तो इंस्ट्रूमेंट चार्जेस, मिनिमम बैलेंस चार्जेस , चेक बाउंस चार्जेस के नाम से लगाए जाते हैं।

पिसेगी गरीब जनता

ऐसे बैंक गरीब कस्टमर के भरोसे नहीं बैठते। वहीं ऐसे निजी बैंक सरकार की उस कोशिश में साथ नहीं देते जहां वह देश के प्रत्येक गरीब आदमी को बैंकिंग के सहारे जोड़ सके। इन प्राइवेट बैंक्स के हिडन चार्जेस, सामान्य आदमी की सोच से बाहर है। उसे पता भी नहीं चलता कैसे ये बैंक कस्टमर से पैसे निकालते है। इनके घोषित इंटरेस्ट रेट और अघोषित इंटरेस्ट रेट में भी बहुत फर्क होता है।

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