पिता का शरीर दान कर अब लगा रहा सरकारी ऑफिस के चक्कर

0

जयपुर। एक व्यक्ति अपने पिता के मौत के बाद उनके मृत शरीर का अंतिम संस्कार करने के बजाय उनके शरीर को जयपुर के निम्स मेडिकल कॉलेज में दान कर दिया। जिसके वजह से उसे अपने पिता के मौत का मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए नगर निगम के चक्कर काटनें पड़ रहे है।

सामान्य तौर पर, शवदाहगृह के रिकार्ड के आधार पर मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं जो स्वत: म्युनिसिपल ऑफिस में अपडेट हो जाता है। इस केस में उसके पिता के दाह-संस्कार का कोई रिकार्ड ही नहीं है। इसलिए म्युनिसिपल कार्पोरेशन ने सर्टिफिकेट जारी करने से इंकार कर दिया।

निम्स मेडिकल कॉलेज

निम्स मेडिकल कॉलेज में दान किया था पिता का शरीर

राजस्थान में उदयपुर के मूर्लीपुरा निवासी दिनेश अग्रवाल ने अपने पिता नंद लाल भूत का शरीर निम्स मेडिकल कॉलेज को डोनेट कर दिया। उन्होंने कहा, ‘मेरे पिता चाहते थे कि मौत के बाद उनका शरीर बर्बाद न किया जाए। उन्होंने मौत से एक साल पहले इसके लिए फार्म भी भर दिया था। उनकी इच्छा के अनुसार मैंने उनके शरीर को दान कर दिया।‘

मेडिकल कॉलेज की रसीद देखकर मृत्यु प्रमाण देने का प्रावधान

2014 में जारी किए गए जेएमसी के सर्कुलर में कहा गया था कि अगर कोई शोध या अकादमिक उद्देश्य के लिए बॉडी डोनेट करता है, तो उसे अंतिम संस्कार की रिपोर्ट नहीं जमा करानी होगी बल्कि मेडिकल कॉलेज की रसीद के आधार पर ही उनके परिवार वालों को मृत्यु प्रमाणपत्र दे दिया जाएगा। दिनेश ने बताया कि पिछले 15 दिनों से अपने पिता के डेथ सर्टिफिकेट के लिए जयपुर नगर निगम (JMC) के एक ऑफिस से दुसरे ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ रहे है।

मेडिकल कॉलेज की रसीद दिखाने के बाद भी जयपुर नगर निगम मृत्यु प्रमाणपत्र देने को तैयार नहीं है। इलाके के सलाहकार किशन लाल अजमेरा ने कहा कि अग्रवाल ने अच्छे काम के लिए शव को दान किया, लेकिन उन्हें पिता का मृत्यु प्रमाणपत्र ही नहीं मिल रहा है। यह दुख की बात है।

 

loading...
शेयर करें