फिल्म रिव्यू : मां- बेटी के अनोखे रिश्ते की कहानी है ‘निल बट्टे सन्नाटा’

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फिल्म का नाम: निल बट्टे सन्नाटा

डायरेक्टर: अश्विनी अय्यर तिवारी

स्टार कास्ट: स्वरा भास्कर, रिया शुक्ला, पंकज त्रिपाठी, रत्ना पाठक शाह

रेटिंग: 3.5 स्टार

निल बट्टे सन्नाटा

निल बट्टे सन्नाटा फिल्म रिव्यू

डायरेक्टर अश्विनी अयय्यर तिवारी की ये पहली फिल्म है। इससे पहले उन्होंने बहुत सारी एड फिल्में बनाई हैं। निल बट्टे सन्नाटा फिल्म का कॉन्सेप्ट काफी हटकर है। देखते हैं उनकी ये पहली कोशिश लोगों को पसंद आती है या नहीं।

कहानी

कहानी उत्तर प्रदेश के ‘आगरा शहर’ की है जहां एक कामवाली बाई चंदा सहाय (स्वरा भास्कर) अपनी बेटी अपेक्षा सहाय (रिया शुक्ला) के साथ रहती है। जब अपेक्षा दसवीं क्लास में पहुंचती है तो चंदा को उसकी काफी चिंता होने लगती है क्योंकि अपेक्षा की गणित काफी कमजोर होती है। फिर चंदा जिनके घर काम करती है उनकी सलाह लेकर उसी स्कूल में दाखिला लेती है जहां अपेक्षा पढ़ती है। फिर एक ही क्लास में पढ़ते हुए मां और बेटी के बीच कॉम्पिटिशन भी शुरू हो जाता है जिसका अंजाम काफी अनोखा होता है। और यह अंजाम क्या होता है इसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

निर्देशन

तारीफ करनी होगी डायरेक्टर अश्विनी अय्यर तिवारी की, जिन्होंने स्क्रिप्ट पर कहीं समझौता नहीं किया और एक गरीब मां के सपनों को पूरी ईमानदारी के साथ पर्दे पर पेश किया। मां-बेटी के बीच तनाव और उनके बीच विचारों के टकराव को डायरेक्टर ने कहानी का अहम हिस्सा बनाया तो फिल्म के चार प्रमुख किरदारों मां-बेटी, मैथ टीचर और डॉक्टर मैडम को पूरी फुटेज देते हुए हर कलाकार से बेहतरीन काम लिया। स्कूल में मां-बेटी के बीच की टसन और एक कामवाली बाई के घर और आस-पास के माहौल को पूरी ईमानदारी के साथ पेश किया। बेशक फिल्म की शुरुआत सुस्त है, लेकिन क्लाइमैक्स आपकी आंखें नम करने का दम रखता है।

स्क्रिप्ट

फिल्म की कहानी काफी सिंपल है जिसे बड़े ही अच्छे ढंग से डायरेक्टर ने दर्शाया है। मां-बेटी, उनकी गरीबी और सपने को पूरा करने की चाह को फिल्म के दौरान दिखाया गया है। स्क्रिप्ट लेवल पर कहानी 100 मिनट में पूरी हो जाती है। आपसी झगड़ों, स्कूल में बर्ताव और निजी जिंदगी की झलकियों को कैमरे में बखूबी कैद किया गया है।

एक्टिंग

स्वरा भास्कर की बेहतरीन एक्टिंग से सब वाकिफ हैं। लीड रोल में स्वरा भास्कर और उनकी बेटी बनी रिया शुक्ला ने कहानी के मुताबिक अपनी अदायगी का बेहतरीन प्रदर्शन किया है जिससे आप खुद को किरदार से कनेक्ट होता हुआ पाते हैं। कुछ ऐसे पल भी आते हैं जो आपको इमोशनल बनाते हैं। साथ ही मालकिन के किरदार में रत्ना पाठक शाह का अच्छा रोल है। स्कूल के प्रिंसिपल का किरदार अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने बड़ी ही सहजता के साथ निभाया है।

म्यूजिक

फिल्म का गाना ‘डब्बा गुल’ अच्छा है, साथ ही फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी कहानी के साथ सटीक चलता है।

क्यों देखें

अगर आपको लीक से हटकर फिल्में देखना चाहते हैं तो ये फिल्म जरूर देखें। यूपी और दिल्ली मे ंफिल्म टैक्स फ्री हो गई है इसे मिस न करें।

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