इन नोटों पर गांधी नहीं नेताजी के फोटो हैं, आप भी देखिये

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लखनऊ। नेताजी के आजाद हिन्द बैंक को आज कोई नहीं जानता। ठीक वैसे ही जैसे उनसे जुड़ी फाइलें अबतक धूल के गुबार में दफन होकर राज ही रहीं। भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इस नायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत की गुत्थी कब सुलझेगी कह पाना मुश्किल है। लेकिन सुभाष की देश के आर्थिक विकास को लेकर जो सोच थी अब वक्त आ गया है जब उस पर अमल की जरूरत है।

नेताजी के आजाद हिन्द बैंक

चलिये आज आपको नेताजी के आजाद हिन्द बैंक की कहानी सुनाते हैं। जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस की सरकार बनी थी और उस दौरान चला था एक लाख रूपये तक का नोट। एक लाख का नोट था इस बात की तस्दीक नेताजी के चालक रहे कर्नल निजामुद्दीन भी करते हैं। एक लाख रूपये का नोट जारी करने वाले आजाद हिन्द बैंक को तब भारत सहित 10 देशों का समर्थन प्राप्त था।

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नेताजी के आजाद हिन्द बैंक की स्थापना कब हुई

आजाद हिन्द बैंक की स्थापना 1943 में हुई थी। आजाद हिंद सरकार व फौज को समर्थन देने वाले देशों में बर्मा, क्रोएशिया, जर्मनी, नानकिंग (वर्तमान में चीन), मंचूको, इटली, थाइलैंड, फिलीपींस, व आयरलैंड शामिल थे। इन देशों ने ही बैंक और इसकी करेंसी को भी मान्यता दी थी।

बैंक की ओर से दस रूपये के सिक्के से लेकर एक लाख रूपये तक के नोट तक जारी किए गए थे। इसके पूर्व तक आजाद हिन्द बैंक की और से जारी 5000 के नोट की ही जानकारी सार्वजनिक थी।

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पाँच हजार का एक नोट बीएचयू के भारत कला भवन में सुरक्षित रखा हैं, जबकि शनिवार को एक लाख के नोट की तस्वीर नेताजी की प्रपौत्री राज्यश्री चैधरी ने विशाल भारत संस्थान को उपजब्ध कराई हैं।

बीएचयू के प्रोफेसर और जनता आयोग में शामिल होने वाले प्रो. राजीव श्रीवास्तव भी कहते हैं नेताजी की एक आवाज पर विदेश में रहने वाले भारतीयों ने उन्हें सोने-चांदी से तौल दिया था। साथ ही आजाद हिंद सरकार ने अपनी करेंसी भी जारी की थी। इसमें एक लाख का नोट भी था। जिसमें नेता जी की तस्वीर छपी हुई थी।

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नोटों पर छपी नेती जी की तस्वीर और भारत का नक्शा 

प्रो. राजीव श्रीवास्तव के अनुसार आजाद हिंद सरकार ने रंगून में 1942-43 में एक लाख, एक हजार, सौ और 10 रुपए के नोट छापे थे। एक लाख के नोट पर स्वतंत्र भारत लिखा है। एक हजार के नोट पर भारत का नक्शा, सौ रुपए के नोट पर तिरंगा और किसान और दस रुपए के नोट पर हिंदुस्तान और जय हिंद लिखा है।

छापे गए सभी नोटों पर नेताजी की तस्वीरें थी। उन्होंने बताया कि उस समय नेताजी के बॉडीगार्ड रहे कर्नल निजामुद्दीन को 17 रुपए तनख्वाह मिलती थी। वहीं, आजाद हिंद फौज के लेफ्टिनेंट की सैलरी 80 रुपए महीना थी।

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