प्लेन क्रैश में नहीं मरे थे नेताजी, नेहरु के डर से रूस में थे…

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नई दिल्ली: अभी तक कहा जाता रहा है कि आजादी की लड़ाई में अहम योगदान निभाने वाले सुभाष चन्द्र बोस ( नेताजी )की मौत 1945 में हुए एक प्लेन क्रैश में हुई थी लेकिन अब जो जानकारी मिल रही है उसे सुनकर आप चौक उठेंगे। दरअसल, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की तरफ से बीते गुरूवार को सार्वनिक की गई एक फ़ाइल से पता चला है कि उनकी उनकी मौत 1945 को प्लेन क्रैश में नहीं हुई। बल्कि साथ के दशक में भी वह जिन्दा थे और छिपकर रूस में रह रहे थे।

नेताजी

नेताजी पर नेहरु ने बनाया था निर्वासन का दबाव

इन फाइलों में जिक्र है कि सुभाष चंद्र बोस 1968 तक रूस में थे और इस दौरान उनकी मुलाकात क्रांतिकारी वीरेंद्रनाथ चटोपाध्याय के बेटे निखिल चटोपाध्याय से हुई थी।यह बात उजागर हुइ है फाइलों में संलग्न एक हलफनामे से जिसमें लेखक और पत्रकार नरेंद्रनाथ सिकंदर ने लिखा है कि चटोपाध्याय और उनकी पत्नी रूस के साइबोरियाई क्षेत्र  ओम्स्क शहर में मिले थे।

आपको बता दें कि सिकंदर 1966 से 1991 के दौरान मॉस्को में रह रहे थे। सिकंदर ने वर्ष 2000 में यह हलफनामा मुखर्जी कमिशन के पास दाखिल किया था। हलफनामे में सिकंदर ने चटोपाध्याय के हवाले से कहा कि नेताजी इस डर से रूस में छिपे हुए थे कि भारत में उनपर बतौर युद्ध अपराधी केस चलाया जा सकता है। 1966 में वीर सावरकर की मौत के बाद सिकंदर ने मॉस्को में चटोपाध्याय से मुलाकात की थी।

 सिकंदर के इस हलफनामे में यह भी कहा गया है जवाहर लाल नेहरू  नेताजी पर रूस में निर्वासन में रहने का दवाब बना रहे है। नेताजी को इस बात का डर था कि कहीं नेहरू की वजह से उन्हें भारत में अपराधी की श्रेणी में न गिना जाने लगे।

जब वह मंचूरिया के रास्ते तब के सोवियत संघ में आए तो स्टालिन, मोरोतोव बेरिया और बोर्शिलोव ने भारत के बारे में जानकारी रखने वाले स्कॉलरों को संपर्क किया और उन्होंने स्टालिन को सलाह दी कि वे सोवियत दूतावास के जरिए लंदन में कृष्ण मेनन से संपर्क करें। तब कृष्ण मेनन ने साफ तौर पर नेहरू का पक्ष लिया और स्टालिन को सलाह दी कि वह इस जानकारी को सार्वजनिक नहीं करें।

बता दें कि इससे पहले केंद्रीय संस्कृति सचिव एनके सिन्हा ने बीते 27 मई को नेताजी से जुड़ी 25 फाइलों के चौथे संस्करण को सरकारी वेबपोर्टल के माध्यम से सार्वजनिक किया था जिसमें 1968 से 2008 की अवधि की प्रधानमंत्री कार्यालय की पांच फाइलें, गृह मंत्रालय की चार फाइलें और विदेश मंत्रालय की 16 फाइलें शामिल थी।

इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जनवरी 2016 को नेताजी की 119वीं जयंती के अवसर पर उनसे जुड़ी 100 फाइलों के पहले बैच को सार्वजनिक किया था। 29 मार्च 2016 को 50 फाइलों का दूसरे बैच और 29 मार्च 2016 को 25 फाइलों के तीसरे बैच को केन्द्रीय संस्कृति मंत्री डॉ। महेश शर्मा ने किया।

 

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