नेताजी को कांग्रेस के इस बड़े नेता ने बताया था युद्ध अपराधी

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नेताजी सुभाष चंद्र बोसनई दिल्ली। नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर पहला बड़ा खुलासा हो गया है। इस खुलासे से पता चला है कि कांग्रेस के एक बड़े नेता ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को युद्ध अपराधी बताया था। दरअसल आज नेताजी की जयंती है और आज ही मोदी सरकार नेताजी की 100 फाइलों को सार्वजनिक करने वाली है। इन सौ फाइलों में एक चिट्ठी वह भी होगी जिसमें नेताजी के लिए ये बात कही गई है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस को बताया युद्ध अपराधी

दरअसल ये चिट्ठी भारत के पहले प्रधानमंत्री और कांग्रेस के पूर्व वरिष्‍ठ नेता जवाहर लाल नेहरू की है। नेहरू ने ये चिट्ठी इंग्‍लैंड के तत्‍कालीन प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली को 27 दिसंबर 1945 को लिखी थी। इसी चिट्ठी में नेहरू ने नेताजी को युद्ध अपराधी की संज्ञा दी है। हालांकि इस चिट्ठी पर सिर्फ नेहरू का नाम लिखा है इसमें उनके हस्‍ताक्षर नहीं हैं।

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नेहरू ने इंग्लैंड के तत्कालीन पीएम क्लीमेंट एटली को लिखी इस चिट्ठी में कहा है कि उन्‍हें भरोसेमंद सूत्रों से पता चला है कि सुभाष चंद्र बोस, जो आपके युद्ध अपराधी हैं, उन्हें स्टालिन ने रूस में घुसने की मंजूरी दे दी है। यह रूस का धोखा है, क्योंकि रूस ब्रिटिश-अमेरिकन गठबंधन का मित्र देश है। उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था। इस पर आपको जो सही लगे वह कार्रवाई करें।

आजाद हिंद फौज की 990 फाइलें 1997 में मिली थीं

बता दें कि भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार को साल 1997 में रक्षा मंत्रालय से इंडियन नेशनल आर्मी (आजाद हिंद फौज) से संबंधित 990 फाइलें प्राप्त हुई थीं और वर्ष 2012 में खोसला आयोग (271 फाइलें) और न्यायमूर्ति मुखर्जी जांच आयोग (759 फाइलें) से संबंधित कुल 1030 फाइलें गृह मंत्रालय से प्राप्त हुई थीं। ये सभी फाइलें सार्वजनिक रिकॉर्ड नियम, 1997 के तहत जनता के लिए पहले से ही उपलब्ध हैं।

अब हटेगा मौत के रहस्‍य से पर्दा

हाल ही में ब्रिटेन की एक वेबसाइट ने दावा किया था कि नेताजी की मौत ताईवान में हुए प्‍लेन क्रैश में ही हुई थी। इस वेबसाइट ने अपने दावे को सही ठहराते हुए कई चश्‍मदीदों के बयान भी जारी किए थे। वेबसाइट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत के रहस्‍य के अलावा और भी कई रहस्‍यों से पर्दा उठाने का दावा किया था। वेबसाइट को दावा था कि 18 अगस्‍त 1945 की रात को ही नेताजी ने अंतिम सांस ली थी। वेबसाइट ने चश्मदीदों के तौर पर नेताजी के एक करीबी सहयोगी, दो जापानी डॉक्टरों, एक एंटरप्रेटर और एक ताईवानी नर्स को शामिल किया है।

रात 11 बजे नेताजी ने ली अंतिम सांस

वेबसाइट के द्वारा पेश किए गए चश्‍मदीदों में जापान के डॉ योशिमी ने ही नेताजी का इलाज किया था। वेबसाइट के मुताबिक डा. योशिमी का कहना है कि अस्पताल में भर्ती किए जाने के चौथे घंटे में ऐसा लगा कि उनकी हालत बिगड़ रही है। वह अपनी कोमा की दशा में कुछ फुसफुसाए, बड़बड़ाए, लेकिन वह कभी होश में नहीं लौटे। करीब रात ग्यारह बजे वह चल बसे। डॉ. योशिमी 1956 में मेजर जनरल शाह नवाज की अगुवाई वाली नेताजी जांच समिति और 1974 में न्यायमूर्ति जीडी खोसला आयोग में भी पेश हो चुके हैं।

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