नेपाल की ओली सरकार पर बड़ा संकट

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नेपालकाठमांडू। नेपाल में एक बार वहां की सरकार पर संकट घूम रहा है। नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सात संकट में है। सत्तारूढ़ गठबंधन में फूट पड़ गई है। कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी के सुप्रीमो प्रचंड के नेतृत्व में राष्ट्रीय सहमति की सरकार बनाने का निर्णय लिया है। माओवादी पार्टी ने विपक्षी नेपाली कांग्रेस, मधेसी दलों एवं अन्य राजनीतिक दलों से अपने नेतृत्व में बनने वाली सरकार में शामिल होने की अपील की है।

नेपाल की माओवादी पार्टी ने किया बैठक

राजधानी काठमांडू में माओवादी पार्टी के अध्यक्ष प्रचंड के निवास पर बैठक में प्रचंड के नेतृत्व में सभी दलों को लेकर सरकार बनाने का निर्णय लिया गया। प्रचंड की पार्टी के इस कदम से सीपीएन-यूएमएल के चेयरमैन ओली के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के सामने राजनीतिक संकट पैदा हो गया है। प्रचंड को उनके भारत विरोधी रुख के लिए जाना जाता है। वह पहले भी 18 अगस्त 2008 से 25 मई 2009 तक नेपाल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।

प्रचंड ने प्रधानमंत्री निवास वालुवाटार जाकर पीएम ओली को अपने नेतृत्व में नई सरकार बनाने के पार्टी के फैसले की जानकारी दे दी। हालांकि आधिकारिक तौर पर माओवादियों ने ओली सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा नहीं की है। लेकिन पार्टी के लोगों का कहना है कि बृहस्पतिवार को पार्टी की स्थायी समिति की बैठक में इसकी घोषणा हो सकती है। उधर, माओवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता दीनानाथ शर्मा ने कहा है कि पार्टी ने राष्ट्रीय सहमति की सरकार बनाने का फैसला किया है लेकिन नई सरकार का नेतृत्व कौन करेगा, अभी यह तय नहीं हुआ है।

पीएम ओली की कोशिश हुई नाकाम

पीएम ओली ने माओवादी प्रमुख प्रचंड के साथ डिनर मीटिंग कर सुलह की कोशिश की थी लेकिन वह नाकाम रहे। दूसरी तरफ ओली ने पार्टी के सांसदों को संसद में विपक्ष का सामना करने के लिए पूरी तैयारी के साथ आने को कहा है।

अगले हफ्ते सरकार की ओर से पॉलिसी डॉक्यूमेंट संसद में पेश किया जाना है। वैसे, सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच दरार बढ़ती है तो ओली सरकार को इस महीने के आखिर में बजट पेश करने से रोका जा सकता है। प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस भी ओली सरकार की कार्यशैली से नाखुश है। इससे पहले भी पीएम ओला का कई बार विरोध हुआ है। संविधान लेन के बाद नेपाल में कई दिनों तक आंदोलन चला, उस दौरान भी वहां पीएम ओला की सरकर थी।

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