साेनिया और राहुल गांधी को व्यक्तिगत पेशी से छूट लेकिन सुनवाई जारी रहेगी

0

नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड प्रकरण में सोनिया और राहुल गांधी को थोड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी है। कोर्ट ने कहा है कि इनकी पेशी से सुविधा से ज्यादा असुविधा होती है।

नेशनल हेराल्ड प्रकरण

नेशनल हेराल्ड प्रकरण में राहत

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड प्रकरण में ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर भी रोक लगाने से इनकार कर दिया। कहा कि अब सुनवाई पर रोक नहीं लगाई जा सकती। कोर्ट ने कहा कि आप लोग अपनी दलीलें ट्रायल कोर्ट में आरोप तय होते समय रखें।

कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड प्रकरण में हाईकोर्ट की कुछ टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई और इसे सुनवाई से हटा दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सोनिया और राहुल गांधी पर कहा कि ये प्रतिष्ठित लोग हैं और ट्रायल में हिस्सा नहीं ले सकते। लेकिन जब भी जरूरत होगी कोर्ट में इन्हें बुलाया जा सकता है। अब 20 फरवरी को पटियाला हाउस कोर्ट में नेशनल हेराल्ड प्रकरण में सुनवाई होगी।

नेशनल हेराल्ड प्रकरण के खास बिंदु

वर्ष 1938 में जवाहरलाल नेहरू ने लखनऊ में नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना की थी। पैसों की दिक्कत की वजह से साल 2008 में अखबार बंद हो गया। तब हेराल्ड का मालिकाना हक द एसोसिएट जर्नल्स के पास था।

साल 2011 में एसोसिएट जर्नल्‍स की 90 करोड़ की देनदारी कांग्रेस ने अपने जिम्मे ले ली। इसके लिए कांग्रेस ने उसे 90 करोड़ का लोन दिया। इसके बाद 5 लाख रुपये में यंग इंडिया नाम से एक नई कंपनी बनाई जाती है। इसमें राहुल और सोनिया गांधी की 38-38 फीसदी और बाकी 24 फीसदी हिस्सेदारी मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नाडिस के पास होती है।

इसके बाद एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड के 10 रुपये मूल्य के 9 करोड़ शेयर यंग इंडिया कंपनी को दे दिया गया। ये शेयर 90 करोड़ लोन के एवज में दिया गया। इस 9 करोड़ शेयर की वजह से यंग इंडिया की भागीदारी एसोसिएट जर्नल्स में 99 फीसदी हो गई। इसके बाद कांग्रेस ने एसोसिएट जर्नल्स का 90 करोड़ का लोन माफ कर दिया। इससे यंग इंडिया कंपनी को मुफ्त में ही एसोसिएट जर्नल्स का मालिकाना हक मिल गया।

इस मामले में सुब्रमण्यम स्वामी ने 90 करोड़ के हवाला कारोबार का शक जताते हुए राहुल, सोनिया और कांग्रेस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि 1600 करोड़ की कीमत वाली हेराल्ड हाउस को हथियाने के लिए यह सब किया गया। स्वामी का यह भी आरोप है कि साजिश के तहत यंग इंडिया लिमिटेड को एसोसिएट जर्नल्स की संपत्ति का मालिकाना हक दिया गया।

हेराल्ड हाउस में अभी पासपोर्ट का दफ्तर है। इसे लेकर स्वामी का आरोप है कि केंद्र ने अखबार चलाने के लिए जमीन दी थी, न कि कोई बिजनेस करने के लिए।

loading...
शेयर करें