2017 में भाजपा सरकार के एजेंडे, चुनौतियां और घोषणाएं

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नोटबंदीडॉ राधेश्याम द्विवेदी।

8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा तथा 30 दिसम्बर के इसके प्रथम चरण पूरे होने के बाद लोग इस बात पर चर्चा कर रहे है कि काले धन, भ्रष्टाचार तथा आतंकवाद को मुख्य मुद्दा बनाकर मोदी सरकार आने वाले समय में और भी प्रभावी फैसले ले सकती है। साथ ही नोटबंदी के बाद बने हालात को सामान्य एवं गतिशील बनाने के लिए बजट में भी कुछ और घोषणायें भी हो सकती हैं। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक नोटबंदी के दौरान दिन पर दिन, यहाँ तक कि घंटे दर घंटे, बदलते सरकारी रुखों से इस बारे में कुछ भी पुख्ता कह पाना मुश्किल है।

30 दिसंबर के बाद आयकर चोरी के संदिग्धों पर छापे बढ़ सकते हैं, बेनामी संपत्ति पर शिकंजा कसने के साथ-साथ सोने की खरीदारी पर भी अंकुश लगाने के लिए नियम कड़े किए जा सकते हैं। नोटबंदी के बाद सरकार की नीति में लगातार बदलाव ने देश की अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया है और आगे भी हो सकता है। नोटबंदी के दौरान नीति में लगातार बदलाव से निवेशकों पर बुरा असर पड़ा। नीति में स्थिरता होना जरूरी होती है, लेकिन इस मुद्दे पर लगातार असमंजस की स्थिति बनी और अभी तक जारी है। आम बजट में वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली लोगों के लिए आयकर की सीमा बढ़ाने की घोषणा कर सकते हैं। सरकार ये बताना चाहेगी कि नोटबंदी से उसने काले धन की समानांतर अर्थव्यवस्था को खत्म करने की कोशिश की है और इसके बाद कर वसूली बढ़ेगी। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए वह आयकर छूट की सीमा बढ़ सकती है। इससे सरकार नोटबंदी की परेशानी से लोगों की नाराजगी को कुछ हद तक दूर भी कर सकती है। केंद्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली द्वारा आगामी 1 फरवरी को बजट पेश किया जाएगा।

भारतीय जनता पार्टी 2017 को बड़ी उम्मीद भरी निगाह और सावधानी से भी देख रहे होंगे। उनकी उम्मीद की सबसे बड़ी वजह 2016 में पार्टी को मिली चुनावी कामयाबी है। नोटबंदी के फैसले के बाद शहरी और ग्रामीण इलाकों में लोगों के सामने हुई मुश्किलों के बावजूद पार्टी स्थानीय चुनावों में जीत हासिल करने में कामयाब रही। दूसरी ओर, उन्हें सावधानी बरतने की जरूरत भी होगी क्योंकि नोटबंदी को लेकर परस्पर विरोधी विचार और फीडबैक मिल रहे हैं। शुरुआत में कहा गया कि नोटबंदी के फैसले से जाली नोटों पर अंकुश लगाना संभव होगा ताकि चरमपंथियों को मिलने वाले पैसों पर अंकुश लग सके। कहा यह भी गया कि पाकिस्तान से हमारे देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए जाली नोट भेजे जा रहे थे।

नोटबंदी के 50 दिन बीतने के बाद विपक्ष और आम लोग ये आरोप लगा रहे हैं कि इस फैसले से आम लोगों का जीवन पर असर पड़ा है, क्योंकि उन्हें दो हजार (और किस्मत अच्छी हो तो 2500 रुपये)के लिए कई घंटे तक लाइन में लगना पड़ रहा था और जरूरत की खर्चों के लिए पैसों के इंतजाम में मुश्किल से हो पा रहा था। इससे लघु और मध्यम श्रेणी के उद्योग धंधों पर काफी असर पड़ा है, क्योंकि यह पूरा सेक्टर नकद लेन-देन से चलता था। इस क्षेत्र में हजारों नौकरियां चली गईं हैं क्योंकि मालिकों के पास मजदूरी देने के लिए नकद पैसे नहीं हैं। इसमें हर तरह के निपुण से लेकर दिहाड़ी काम करने वाले मजदूर भी शामिल रहे हैं। किसानों को खासी मुश्किलें हुई हैं क्योंकि बुवाई के सीजन में वे ना तो बीज खरीद पा रहे थे और ना ही सिंचाई या खाद खरीद पा रहे थे।

ये मुश्किलें बीजेपी के लिए बेहद खराब वक्त में सामने आई हैं, क्योंकि फरवरी-मार्च में, उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। उत्तर प्रदेश में बीते 15 साल के दौरान भारतीय जनता पार्टी की सरकार नहीं बनी है, हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया और अपना दल के साथ मिलकर राज्य की 80 सीटों में से 73 सीटें जीत लीं है । अगर भारतीय जनता पार्टी 2014 के लोकसभा चुनाव की लहर को कायम रख पाए तो उत्तर प्रदेश की 403 सीटों में 365 सीटें पार्टी को मिल सकती है। लेकिन अच्छी चीज हमेशा के लिए स्थाई नहीं होती हैं।

2014 के बाद, भारतीय जनता पार्टी को उत्तर प्रदेश के उपचुनाव और पंचायत चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। इन झटकों के बाद उत्तर प्रदेश को समाजवादी पार्टी से मुक्त कराने के बीजेपी के उत्साह को धक्का पहुंचा और उन्हें अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ा। अब भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर नई रणनीति बनाई है। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सहयोग, जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश, विचारधारा और व्यवहारिकता से मेल खाने वाले मुद्दों का सही संयोजन, विकास पर ही ज्यादा बल देना और मोदी को एक बार फिर से चेहरे के तौर पर पेश करना आदि शामिल है। यद्यपि बीते कुछ समय में कुछ चीजें भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में भी होती हुई दिखलाई पड़ रही हैं।

समाजवादी पार्टी के अंदर पारिवारिक कलह चरम पर पहुंच चुका है, जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को कमतर दिखाने की कोशिश चल रही है। वहीं बहुजन समाज पार्टी भी अपना अभियान ठीक अंदाज में शुरू नहीं कर सकी है और पार्टी के कई बड़े नेता बीजेपी के पाले में जा चुके हैं। ऐसे में अमित शाह और उनकी टीम सवर्ण वर्ग- पिछड़ा वर्ग (यादव को छोड़कर) और दलितों (जाटव को छोड़कर) को एक साथ लाने की कोशिश में लगी हुई है।

नोटबंदी के चलते भारतीय जनता पार्टी के सामने चुनौतियां भी बढ़ी हैं, जिसमें सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के कोर मतदाताओं की नाराजगी है, क्योंकि इस फैसले से बनिया समुदाय में नाराजगी है। मोदी के मेक इन इंडिया स्लोगन से साथ आए उद्योग धंधे चलाने वालों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है और किसानों की समस्याएं भी बढ़ी हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नोटबंदी के बाद हुए नुकसान को कम करने की है। उपरोक्त चुनौतियों के अलावा 2017 के नए साल में पार्टी के सामने गोवा की अपनी सरकार को बचाने की भी चुनौती होगी। राज्य में पार्टी के अंदर टूट का खतरा भी बना हुआ है। सहयोगी महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी से मतभेद भी बढ़े हुए हैं।

इसके अलावा पार्टी की कोशिश उत्तराखंड में कांग्रेस को सत्ता में वापस आने से रोकना भाजपा के लिए एक चुनौती भरा कदम होगा। इसके लिए अभी हाल ही में मोदी जी ने राजमार्ग का एक बहूत बड़ा प्रोजक्ट लांच किया है। पंजाब में अकालियों के साथ अपनी गठबंधन सरकार को बचाए रखने की चुनौती भाजपा के लिए होगी। कांग्रेस तथा आप इसे रोकने की भरपूर कोशिशें कर रहे हैं। यद्यपि असम और अरुणांचल में भाजपा ने अपनी पैठ बना ली है । इसके साथ साथ मणिपुर में आगामी चुनाव को जीतने की भाजपा पूरी कोशिश करेगी।

उपरोक्त छोटे-छोटे चुनावों के साथ बीजेपी की चुनौती का दौर समाप्त नहीं होगा, क्योंकि दिसंबर, 2017 में गुजरात में चुनाव होने हैं। मोदी और अमित शाह के अपने राज्य में चुनाव जहां, पार्टी 1995 के बाद से ही सत्ता में है। गुजरात देश का सबसे व्यापार प्रधान राज्य है। नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर इस राज्य को झेलना पड़ा है लिहाजा भारतीय जनता पार्टी के सामने बड़ी मुश्किल चुनौती होगी। राज्य का पटेल समुदाय पिछड़ी जातियों जितने आरक्षण की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहा है, इससे दलितों में बेचैनी देखने को मिली रही है। राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को आनंदीबेन पटेल की जगह कमान अमित शाह ने सौंपी जरूर है लेकिन इसे कामचलाऊ व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है। नए साल में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अहम चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने की होगी।

उपरोक्त स्थानीय मुद्दों के अलावा बीजेपी सरकार को देश के नए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव करना होगा। इसको प्रभावित करने वाले कई पहलू हैं लेकिन उनमें उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बीजेपी के जीती हुई सीटें अहम होंगी। इस क्रम में अडवानी तथा नजमा हेयातुल्ला के नाम भी कभी कभार सुर्खियों में आ जाया करते है। नववर्ष की पूर्वसंध्या पर प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में गांव, गरीब, किसान, दलित, पीड़ित, वंचित, महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को सशक्त करने का दृढसंकल्प दोहराया। इस दौरान विधानसभा चुनावों के आलोक और परंपरागत वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री की घोषणाओं में सबसे ज्यादा गरीबों, किसानों और मझोले व्यापारियों के लिए घोषणाएं की गईं। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री की घोषणायें मिनी बजट जैसा लुक दे रही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वो देश के सवा सौ करोड़ नागरिकों के लिए कुछ नई योजनाएं ला रहे हैं। उन्होंने गरीब, मध्यम वर्ग के लोग घर खरीद सकें इसके लिए बड़े फैसले लिए। इस योजना के तहत 2017 में घर में बनाने के लिए 9 लाख तक के कर्ज पर 4% और 12 लाख तक के कर्ज पर ब्याज में 3% की छूट दी जाएगी। इसके साथ ही 2017 में गांव में रहने वाले जो लोग अपना घर बनाना या पुराने घर की मरम्मत कराना चाहते हैं उन्हें 2 लाख रुपये तक के कर्ज के ब्याज में 3 % छूट देने की घोषणा की। युवाओं को ध्यान में रखते हुए मुद्रा योजना की धनराशि को दोगुना करने की भी घोषणा की। पिछले साल करीब साढ़े तीन करोड़ लोगों ने इसका फायदा उठाया।

प्रधानमंत्री ने जिन वर्गों को कठिनाई हुई है उन्हें ध्यान में रखते हुए घोषणाएं की और इसके लिए किसानों के 60 दिन के कर्ज पर ब्याज को माफ करने की घोषणा की। उन्होंने कैश क्रेडिट लिमिट की सीमा को बढ़ाने की घोषणा की। किसान नाबार्ड से कर्ज ले सकें इसके लिए धन राशि में 20,000 करोड़ रुपये का इजाफा किया गया। प्रधानमंत्री ने बताया कि डिस्ट्रिक्ट कॉपरेटिव सेंट्रल बैंक और प्राइमरी सोसायटी से जिन किसानों ने खरीफ और रबी की बुवाई के लिए कर्ज लिया था उस कर्ज के 60 दिन का ब्याज सरकार वहन करेगी और किसानों के खातों में ट्रांसफर करेगी। प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं, व्यापारी वर्ग, किसानों को भीम एप से जुड़ने का आग्रह किया है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आधी आबादी यानी महिलाओं का भी ख्याल रखा। गर्भवती महिलाओं को की डिलिवरी के लिए 6000 रुपये की आर्थिक मदद देने का एलान किया गया। इस राशि को सीधे उनके अकाउंट में जमा किया जाएगा। वर्तमान में यह पायलट परियोजना चार हजार रुपये और 53 जिलों में चलाई जा रही है

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