नौसेना चीफ का ऐलान, कलवरी पनडुब्बी जुलाई-अगस्त में होगी नौसेना में शामिल

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नई दिल्ली। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने बुधवार को कहा कि पहली स्वदेशी स्कॉर्पिन पनडुब्बी कलवरी जुलाई-अगस्त में सेना में शामिल कर ली जाएगी। लांबा ने यहां एक सम्मेलन से इतर कहा, “कलवरी परीक्षण के अंतिम चरण से गुजर रही है और उम्मीद है कि जुलाई-अगस्त में नौसेना में शामिल हो जाएगी।”

पनडुब्बी ने 27 मई को एक टॉरपीडो को सफलतापूर्वक फायर किया था। सूत्रों ने कहा कि पनडुब्बी को नौसेना में शामिल करने से पहले यह अंतिम अहम परीक्षण था। कलवरी ने दो मार्च को पहली बार सफलतापूर्वक एंटी-शिप मिसाइल फायर की थी। भारत में स्कॉर्पिन श्रेणी की छह पनडुब्बियों का निर्माण हो रहा हैं, जिनमें कलवरी पहली पनडुब्बी है।

स्कॉर्पिन पनडुब्बी का निर्माण फ्रांस के डीसीएनएस द्वारा प्रौद्योगिकी स्थानांतरण के साथ प्रोजेक्ट 75 के तहत मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड द्वारा किया गया था। दो पनडुब्बियां तैयार हैं, जबकि चार अन्य का निर्माण चल रहा है। दूसरी पनडुब्बी खंडेरी को इस साल 12 जनवरी को लॉन्च किया गया था, जिसे बंदरगाह व समुद्र की सतह पर कठिन परीक्षणों के दौर से गुजरना होगा, जिसके बाद उसे पानी के नीचे उतारे जाने के बाद नौसेना में शामिल किया जाएगा।

अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त स्कॉर्पिन चकमा देने में माहिर है और गाइडेड हथियारों के माध्यम से दुश्मनों पर वार करने में सक्षम है। स्कॉर्पिन पानी के अंदर तथा सतह पर टॉरपीडो, एंटी-शिप मिसाइल के माध्यम से वार कर सकता है। श्रीलंका द्वारा चीनी पनडुब्बी को उसके डॉकयार्ड पर खड़ा न करने की अनुमति न देने के बारे में पूछे जाने पर नौसेना प्रमुख ने कहा, “हम न तो श्रीलंका के साथ किसी तरह की वार्ता कर रहे हैं और न ही उनके संपर्क में हैं। यह फैसला उनका खुद का है।”

स्वदेशी विमानवाहक पोत को नौसेना में शामिल किए जाने के बारे में पूछे जाने पर लांबा ने कहा कि आईएसी का निर्माण तय समय के हिसाब से चल रहा है। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि साल 2019 में उसका परीक्षण शुरू हो जाएगा और साल 2020 में नौसेना में शामिल हो जाएगा।”

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