पंचायत अध्यक्ष चुनाव में हल्ला बोल पर उतरी सपा

लखनऊ। समाजवादी पार्टी जिला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव पर ‘हल्ला बोल’ की तैयारी में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री अपने अफसरों और मंत्रियों के जरिये पंचायत अध्यक्ष चुनावों में बड़े पैमाने पर हेरा-फेरी करेंगे। इसके लिए सपा प्रदेश में जिला पंचायत सदस्य पद पर जीते लोगों पर दबाव बना रही है।

यह आरोप भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डा. चन्द्रमोहन ने पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों के बीच लगाये। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जिला पंचायत अध्यक्ष चुनावों को जीतने के लिए सत्ता का दुरूपयोग शुरू कर दिया है। जिलाधिकारियों और विकास अधिकारियों को सपा प्रत्याशियों को जिताने के लिए जिम्मेदारी दी गयी है। तबादला और कार्रवाई का भय दिखाकर अफसरों को सत्ता का कारतूस बनाया जा रहा है।

प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि सपा का यह चरित्र है कि उसने जिला पंचायत सदस्य चुनाव लड़ने से इंकार किया और जब परिणाम आये जीते लोगों को सपाई घोषित कर दिया। जबकि सपा ने हर किसी को चुनाव लड़ने की छूट दी थी। सपा अब सत्ता का भय बनाकर जीते सदस्यों को अपने पाले में लाने के लए साम-दाम-दंड-भेद का उपयोग करके अत्याचार का नया इतिहास रच रही है।

डा. चन्द्रमोहन ने कहा कि सपा ने जिस तरह से जिला पंचायत अध्यक्ष चुनावों के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा की उससे पार्टी का अन्र्तकलह सामने आ गया है। सूची सामने आते ही हर जिले में सपा संगठन में कलह तेज हो गई है। इससे घबराकर अब सपा अपने प्रत्याशी लगातार बदल रही है।

प्रवक्ता ने कहा कि सपा का अन्तर्कलह इस हालात पर है कि मैनपुरी में ही उसके कुनबे में विरोध हो गया है। बंदायू सांसद धर्मेन्द्र यादव की बहन और भरोल राजपरिवार की बहू संध्या यादव ने सपा के घोषित प्रत्याशी राहुल यादव के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया है।

प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि सपा को आजमगढ़, मैनपुरी, संभल, रामपुर, मुरादाबाद समेत कई जिलों में अपनों का विरोध झेलना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सपा ने पंचायत अध्यक्ष चुनाव में नियम कानून को ताक पर रख दिया है। जीते सदस्यों का प्रमाण पत्र अपने कब्जे में लेकर अपने प्रत्याशियों को वोट देने का दबाव बना रही है। सपा पंचायत अध्यक्ष चुनावों में पैसे का खुला खेल भी खेल रही है, और दूसरी पार्टी के जीते सदस्यों को लालच से खरीदने की कोशिश कर रही है।

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