पठानकोट हादसा: बीएसएफ के दो बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर

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नई दिल्ली। पठानकोट हादसा बंरी छाप छोड़ चुका है। इस हादसे के सोलह दिन बाद बीएसएफ के दो बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर कर दिए गये हैं। ये दोनों अधिकारी गुरदासपुर सेक्टर में पोस्टेड थे। बीएसएफ के दो बड़े अधिकारियों डीआईजी एनके मिश्रा और कमांडेंट एसएस द्वास की जगह अब डीआईजी ए. श्रीनिवासन और कमांडेंट इंदर प्रकाश भाटिया को तैनात किए गए हैं।

बीएसएफ के दो बड़े अधिकारियों का ट्रांसफर

पठानकोट हादसा न हो दोबारा 

भविष्‍य में पठानकोट हादसा दोबारा न हो इसलिए केंद्र और राज्‍य के दोनों जांचकर्ताओं ने एक बात मानी है। जांचकर्ताओं का मानना है कि हमलावर उसी रास्ते से आए थे, जिस रास्ते से दीनागनगर के आतंकी आए थे। गुरदासपुर के दीनानगर थाने पर पिछले साल जुलाई में आतंकी हमला हुआ था। इस इलाके से घुसपैठ न हो, इसकी जिम्मेदारी बीएसएफ पर ही है। केंद्र सरकार हमेशा से कहजी आई है कि वह लापरवाही कतई बर्दाशत नहीं करेगी। बीएसएफ के दो बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर को सख्‍त संकेत माना जा रहा है।

गुरदासपुर के गांव से ही घुसे थे आतंकी
एनआईए ने अपनी शुरूआती जांच के बाद कहा है कि पठानकोट पर हमला करने आए आतंकी गुरदासपुर के बामियाल गांव से घुसे थे। इस गांव में पाकस्तानी ब्रांड के जूतों के निशान भी मिले हैं। जांच में बताया गया है कि बामियाल के पास रावी नदी पर फेंसिंग में भी चूक हुई है जिसका आतंकियों ने फायदा उठाया।बीएसएफ के दो बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर करके केंद्र सरकार ने यह साफ कर दिया है कि वह किसी को भी नहीं बख्‍शेगी।

बीएसएफ का इनकार
बीएएसएफ इससे इनकार कर चुकी है कि सुरक्षा में उसकी तरफ से कोई चूक हुई है। साथ ही इसने पंजाब पुलिस के इस दावे को भी मानने से मना कर दिया है कि पठानकोट के आतंकी दीनानगर वाले रास्ते से ही आए थे। बीएसएफ का कहना है कि पंजाब पुलिस इसके सबूत भी नहीं दे पाई है।

पूरे इलाके में चला था ऑपरेशन
पठानकोट हादसा अभी एक दिन हुआ था तभी गृह मंत्रालय ने बीएसएफ को पंजाब और जम्मू के इलाकों में छानबीन करने के लिए ऑपरेशन चलाने को कहा था, ताकि आतंकियों की एंट्री के सबूत मिल पाएं। दीनानगर हमले के बाद भी ऐसे ही निर्देश दिए गए थे।

आखिर बॉर्डर पर कहां हुई चूक
पंजाब में 500 किलोमीटर लंबे बॉर्डर के बड़े हिस्से में फेंसिंग है, लेकिन रावी नदी वाले बड़े हिस्से में काफी गैप है। आतंकियों के लिए इस इलाके से घुसपैठ आसान है। इन इलाकों पर नजर रखने का जिम्मा गुरदासपुर और अमृतसर सेक्टर में तैनात बीएसएफ अधिकारियों पर है।

क्या तैयारी है घुसपैठ रोकने की
पठानकोट हादसा के बाद घुसपैठ रोकने के लिए बीएसएफ भारत-पाकिस्तान बॉर्डर इलाके में लेजर दीवारों की संख्या बढ़ाने जा रही है। इसके लिए 40 से ज्यादा संवेदनशील पॉइंट चुने गए हैं। पठानकोट हमले के बाद गृह मंत्रालय भी लेजर दीवारें खड़ी करने को प्राथमिकता दे रहा है। पंजाब में सभी नदी पट्टियों पर ये लेजर वॉल लगाई जाएंगी।

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