पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ रहा आतंकियों का आतंक

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आगरा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश मे एक बार फिर से स्लीपर सेल के साथ आंतकियों के सक्रिय होने की आहट आती दिखाई दे रही है। एनआईए अधिकारी तंजीन अहमद की हत्या के संदिग्धों की तलाश मे पुलिस और खुफिया तंत्र के निशाने पर फिर अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाके रहे। इस बार नाई की मंडी स्थित गेस्ट हाउस से आधा दर्जन से अधिक संदिग्धों को दबोचा गया। मामला हाईप्रोफाइल है इसलिए पुलिस के आला अफसरों ने भी अपने मुंह पर ताला डाल लिया है लेकिन कयास भले ही कुछ हो लेकिन अफसरों की चुप्पी और बाहरी जिले के खुफिया तंत्र की सक्रियता कुछ बडे संकेत दे रही है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आंतक की आहट और स्लीपर सेल की मौजूदगी

मामला बेहद गंभीर है लेकिन एनआईए अधिकारी तंजीम अहमद की हत्या के बाद खुफिया एंजेसियों के साथ पुलिस की अब की जांच पड़ताल मे जो बात सामने आ रही है वो पश्चिमी उत्तर प्रदेश मे इनकी मौजूदगी की तरफ इशारा करने को काफी है। आगरा भी इससे अछूता नही है क्योकि जिस तरह से शुक्रवार की शाम को बाहरी जिले की खास पुलिस टीमों ने अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाके मे एक नेता के गेस्ट हाउस पर छापा मारकर छह संदिग्ध युवकों को हिरासत मे लिया और उन्हें गिरफ्तार कर अपने साथ ले गए। उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस अधिकारियों ने साधी चुप्पी

इस मामले मे होटल संचालक का खुद को बार बार निर्दोष करार देना और पुलिस के आलाधिकारियों का मामले पर चुप्पी साध लेना इन सवालों को मजबूती देता दिखायी देता है क्योंकि जिन युवकों को होटल से गिरफ्तार किया गया है उनमे से एक युवक ने जो आईकार्ड होटल मे जमा कराया था। वो एनआईए अधिकारी के हत्यारोपी के पड़ोस के गांव का बताया जा रहा है। इसके साथ पुलिस टीम का उन्हें इस तरह से गिरफ्तार कर यहां से चुपचाप ले जाना भी जता रहा है कि मामला सिर्फ हत्या से नही बल्कि इसके तार कई और जगह तक जुडे हो सकते हैं।

स्लीपर सेल की कमर तोड़ने का काम कर रही पुलिस

एनआईए अधिकारी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश से स्लीपर सेल की कमर तोडने के लिए काम किया लेकिन जिस तरह से उनकी हत्या के पीछे जो कनेक्शन निकल कर सामने आ रहे हैं। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश आंतक की एक नई इबारत को जन्म तो दे ही दिया है। आगरा में इससे पहले भी कई आतंकी शरण पाकर अपने मंसूबों को अंजाम दे चुके हैं और पुलिस को कानों-कान खबर तक नही लगी।

हेडली ने आगरा में की थी रेकी

हेडली का आगरा मे आकर रेकी करने का मामला जिसमे सबसे प्रमुख है। इतना ही नही पीली पोखर, सदर बाजार और अन्य बम ब्लास्ट और तमाम बार आंतकियों का आगरा आकर चला जाना भी आगरा को उनकी पसंदीदा शरण स्थली होने का सबूत देने के लिए काफी है। इसके साथ कुछ महीने पहले ही फुलट्टी बाज़ार में पानी की टैंकी पर आई एस आईएस लिख कर भी सनसनी फैलाने की कोशिश की गयी। अब अफसर भले ही चुप्पी भले ही साधे रहे लेकिन ये आंतकी गतिविधियां इस बात का इकबालनामा है कि कहीं न कहीं आगरा मे आंतकियों का स्लीपल जरूर सक्रिय है।

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