चीन पर निगरानी के लिए हिंद महासागर में बड़ी तैनाती

नई दिल्ली। पसाइडन 8I  (P-8I) अब हिंद महासागर में भारत की निगरानी करेगा। चीन की परमाणु पनडुब्बियों से मुकाबले के लिए अंडमान निकोबार द्वीप पर बने मिलिट्री बेस पर अत्याधुनिक समुद्री पेट्रोलिंग एयरक्राफ्ट पसाइडन 8I और जासूसी ड्रोन तैनात कर दिए गए हैं। पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र में चीन की सक्रियता बढ़ गई थी। ये एयरक्राफ्ट दुधारी तलवार की तरह हैं, जो एंटी-सबमरीन और एंटी-सरफेस वारफेयर को अंजाम देने में सक्षम हैं।

पसाइडन 8I

पसाइडन 8I के बारे में जाने

  • इसकी ऑपरेटिंग रेंज 1,200 नॉटिकल माइल है और अधिकतम रफ्तार 907 किलोमीटर प्रतिघंटा है।
  • यह रडार से लैस है, लिहाजा खुफिया और हर तरह के जासूसी जोखिमों से निपटने में भी सक्षम है।
  • ये खतरनाक हारपून ब्लॉक-II मिसाइलों, MK-54 लाइटवेट विध्वंसक, रॉकेट और बारूद से लैस हैं।
  • P-8I जरूरत और स्थिति को भांपकर दुश्मन की पनडुब्बियों और युद्धपोतों को बेअसर कर सकते हैं।

दो हफ्ते पहले ही कर दी थी तैनाती

एक अंग्रेजी दैनिक के मुताबिक ‘भारत ने दो हफ्ते पहले अंडमान निकोबार में अपने सबसे शक्तिशाली एयरक्राफ्ट पसाइडन 8I को तैनात कर दिया है।’ अंडमान निकोबार द्वीप समूह रणनीतिक रूप से अहम है। नेवी और एयरफोर्स के इजरायली हवाई सर्चर-II व्हीकल्स भी अस्थायी तौर पर यहां तैनात हैं।

2009 में हुआ था अमेरिका से सौदा

भारत ने ऐसे आठ एयरक्राफ्ट हाल ही में अपने नौसेना बेड़े में शामिल किए थे। सौदा 2009 में अमेरिकी कंपनी बोइंग से 2.1 बिलियन डॉलर में हुआ था। इन्हें तमिलनाडु के अराक्कोनम स्थित आईएनएस रजाली नेवल एयर स्टेशन के बेड़े में शामिल किया गया था। चार अन्य P-8I को शामिल करने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। P-8I के जरिए पोर्ट ब्लेयर से पूरे क्षेत्र पर नजर रखी जा सकती है।

अंडमान पर नहीं है ध्यान?

अखबार ने सवाल उठाया है कि अंडमान निकोबार द्वीप समूह की कमांड भारत का पहला और एकमात्र युद्धक्षेत्र है, जो मोदी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में होने के बावजूद उपेक्षा का सामना कर रहा है। यहां मिलिट्री फोर्स लेवल और इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से दुरुस्त करने की जरूरत है। ऐसा करने पर ही हिंद महासागर में चीनी रणनीतिक चाल से प्रभावी तरीके से मुकाबला किया जा सकता है।

यह है जमीनी स्थिति

फिलहाल अंडमान निकोबार कमांड सिर्फ एक पैदल सेना ब्रिगेड के 3,000 सैनिकों, 20 छोटे युद्धपोतों, गश्ती जहाजों और कुछ एमआई -8 हेलीकॉप्टरों के साथ डोर्नियर-228 गश्ती विमान तक ही सीमित है।

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