पीएम मोदी के लिए इस हिंदू लड़की और उसके परिवार ने छोड़ दिया था पाकिस्तान

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राजस्थान एक पाकिस्तानी हिंदू परिवार जो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपना देश छोड़ आया। इस हिंदू परिवार ने ये कदम पीएम मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उठाया था क्योंकि उनको उनसे काफी उम्मीदें थी। 2 साल पहले यह पाकिस्तानी हिंदू परिवार जिस देश को अपना मानकर चला आया था उसी देश के कुछ नियम उनकी बड़ी लड़की की पढ़ाई में रुकावट बन रहे हैं। इस लड़की के सपने पूरे नहीं हो पा रहे हैं।

जिस परिवार की हम बात कर रहे हैं वह पाकिस्तान के सिंध से आकर भारत के जयपुर में रहने लगा है। इन लोगों के पास यहां का लंबे समय का वीजा है। वह पाकिस्‍तान से भारत इसी उम्‍मीद में आई थी कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में कई बड़े बदलाव होंगे।

पाकिस्तानी हिंदू परिवार

पाकिस्तानी हिंदू परिवार को पीएम मोदी से काफी उम्मीदें

मशाल नाम की ये लड़की पाकिस्तानी हिंदू परिवार से है। इस परिवार का मानना है कि दो साल पहले ये लोग जिस देश को अपना मानकर आए थे वहां कुछ नियमों ने उन्‍हें पराया कर रखा है। कुछ नियमों ने उनकी बड़ी लड़की मशाल की पढ़ाई में भी रुकावट पैदा कर दी है। मशाल ने हाल ही में 12वीं की परीक्षा पास की थी।

ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट देना चाहती हैं मशाल

12वीं की परीक्षा में उसने 91 फीसदी अंक हासिल किए थे। इसके बाद मशाल डॉक्‍टर बनने का सपना देख रही थी। लेकिन उनका ये सपना अब उन्‍हें टूटता हुआ महसूस हो रहा है। दरअसल, मशाल ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट देना चाहती हैं, लेकिन फॉर्म नहीं भर सकती क्योंकि फॉर्म में नागरिकता के नाम पर भारतीय और एनआरआई का ही ऑप्शन होता है। अब न तो वह भारतीय हैं और न ही एनआरआई।

राजस्थान सरकार से भी बात की

इसको लेकर मशाल के घरवालों ने राजस्थान सरकार से भी बात की। लेकिन वहां की सरकार ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि यह परीक्षा तो केंद्र सरकार करवाती है। जयपुर के ही एक प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीजों का इलाज कर रहे मशाल के माता-पिता का कहना है कि उनके पास किसी प्राइवेट कॉलेज से पढ़ाई करवाने लायक पैसे नहीं हैं। वहीं मशाल भी अब निराश होने लगी है।

क्या कहती हैं मशाल

पाकिस्तानी हिंदू परिवार की मशाल का कहना है कि अगर यह मामला अगले दो-तीन महीनों में नहीं सुलझा तो उसे डॉक्टर बनने का सपना छोड़कर कुछ और करना होगा। इसकी कोचिंग के लिए वह वैसे ही अपना काफी वक्त और पैसा लगा चुकी हैं। वहीं मशाल के पिता ने आखिर में बस इतना कहा कि वहां उन्‍हें हिंदू कहा जाता था और यहां पाकिस्तानी के नाम से पहचाना जाता है।

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