पिपराइच थाने के आधे सिपाही एक ही हल्के में, तो अपराध भी अधिक

वेद प्रकाश पाठक/गोरखपुर। पिपराइच थाने के एक हल्के में  सिपाही ज्यादा हैं तो अपराध भी अधिक। सुनने में अटपटा है क्योंकि खराब कानून व्यवस्था के लिए अक्सर आला अधिकारी पुलिस के संख्या बल में कमी को लेकर रोना रोते रहते हैं। यह तर्क आम है कि जनता की तुलना में पुलिस की संख्या कम है। ऐसा होगा भी। लेकिन गोरखपुर जनपद का पिपराइच थानाक्षेत्र ऐसे तर्कों को आईना दिखा रहा है।

पिपराइच

थाने के आधे सिपाही कर रहे एक हल्के की रखवाली

पिपराइच थाने के एक हलके में 29 गांवों पर 18 सिपाहियों को रखवाली का जिम्मा मिला है लेकिन फिर भी ताबड़तोड़ डकैती और चोरी की घटनाएं हो रही हैं। दरअसल, इन सिपाहियों ने कमाऊ होने के नाते इस हलके में ड्यूटी तो लगवा ली लेकिन ड्यूटी कर नहीं रहे हैं। भला हो हलके के तहत आने वाले जंगल सुभान अली के ग्रामीणों का जिन्होंने खुद साहस दिखाकर डाकुओं का मुकाबला किया और एक डकैत को मार गिराया। वरना पुलिस के हाथ इस मामले में भी खाली ही रह जाते।

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पिपराइच थाने में तैनाती की है भारी डिमांड

पिपराइच थाने के हलका संख्या तीन की पुलिसकर्मियों में खास मांग है। वजह इस हलके में कच्ची शराब की आधा दर्जन से ज्याद भट्ठियां हैं। जुए और अवैध खनन के लिए पहचान रखने वाले इस हलके में हर सिपाही पोस्टिंग चाहता है। अफसर खुश होते हैं तो यह भी भूल जाते हैं कि पिपराईच थाने की आधी फोर्स केवल एक हलके में लगाना कहां तक जायज है।

हलका नंबर तीन इस मामले में खुशनसीब है कि यहां सबसे ज्यादा सिपाही तैनात हैं, लेकिन बदनसीबी यह है कि सब के सब दिन की वसूली से थककर रात में सो जाते हैं। लिहाजा इस हलके में चोरी और डकैती की घटनाएं बढ़ गई हैं। पूरे पिपराईच थाने में कुल सिपाहियों की संख्या 30-35 के आसपास है, जिनमें से कुछ सिपाही बाहर गए हुए हैं।

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बेखौफ हैं अपराधी

इसी साल 6/7 जनवरी के बीच विजय निषाद के यहां बड़ी डकैती पड़ी। पिछले हफ्ते जंगल धूषण में एक ज्वैलर्स की दुकान से लाखों की चोरी हुई। बीती रात भी डकैतों ने एक लाख से ज्यादा का जेवर और 50 हजार नकद लूट लिया। नये साल में घटी ये तीनों बड़ी घटनाएं हलका नंबर तीन की हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस को खनन माफियाओं, कच्ची शराब के ठेकेदारों और जुए के अड्डों की वसूली से फुर्सत ही नहीं है। लिहाजा न रात में गश्त होती है और न कोई अंकुश। पुलिस पिकेट सिर्फ दावतें उड़ाने के काम आ रहा है और यहां देर रात पुलिस सोते हुए ही मिलेगी।

शुक्र है विधायकजी के बेटे पहुंच गए

डकैत को पीटकर मारने के मामले में पिपराईच पुलिस ग्रामीणों पर मुकदमा कायम करने की फिराक में थी। यही वजह है कि पुलिस ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) पर डकैत को पीड़ित तूफानी के माध्यम से एडमिट कराया। जबकि डाकू को स्वास्थ्य केन्द्र तक लाने वाली खुद पिपराईच पुलिस थी। गनीमत यह रही कि सपा विधायक राजमति निषाद के बेटे अमरेंद्र निषाद मौके पर पहुंच गए और उन्होंने गांववालों की पीठ थपथपा दी। विधायक के हस्तक्षेप से पुलिस मनमानी न कर सकी। वरना इस मामले में भी मुकदमा कायम कर पूरे गांव से वसूली की तैयारी थी।

बेतिया का था मारा गया डाकू

शुरूआती जांच में यह बात सामने आ रही है कि पब्लिक ने जिस डाकू को मार गिराया था वह बिहार प्रांत के बेतिया जिले का रहने वाला था। डाकू को पकड़ने वाले ग्रामीणों का कहना है कि उसने सिर्फ यही बताया था कि वह बेतिया (बिहार) का निवासी। डाकू का पूरा नाम और पता नहीं चल पाया है। अब पुलिस बिहार से सम्पर्क साधकर डाकू का विवरण इकट्ठा करने का प्रयास करेगी।

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