यूजीसी ने बदले नियम, पीएचडी कर रही महिलाओं को मिलेगी ये छूट

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देहरादून। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने पीएचडी की इच्छुक महिलाओं के लिए उनकी सभी समस्याओं का समाधान कर दिया है। क्योंकि ज्यादातर महिलाएं जब रिसर्च में कदम रखती हैं, तो उनके लिए कई दिक्कतें उभर कर आती हैं। कभी उनपर शादी का दबाव पड़ने लगता है, तो कभी कुछ….

पीएचडी

पीएचडी जैसे पाठ्यक्रमों में महिलाओं की हिस्सेदारी बहुत कम

इसलिए यूजीसी के नए नियमों के अनुसार महिलाओं को पीएचडी पूरी करने के लिए दी गई अवधि में दो साल और एमफिल में एक साल की छूट मिलेगी। इसके अलावा अगर शादी हो जाने के बाद ससुराल किसी अन्य शहर में है तो महिला शोधार्थी अपना रिसर्च अन्य विश्वविद्यालय में स्थानांतरित करवा सकती है। गर्भवती होने पर भी मैटरनिटी लीव के तौर पर 240 दिन का अवकाश ले सकती है।

तकनीकी विश्वविद्यालय ने ऐकेडमिक काउंसिल की मुहर के बाद पीएचडी को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। अगले सत्र से इसे लागू कर दिया जायेगा। क्योंकि एमफिल व पीएचडी जैसे पाठ्यक्रमों में महिलाओं की हिस्सेदारी बहुत कम है। ऐसा करने से उनकी तादात बढ़ेगी हर साल पीएचडी के लिए विवि स्तर पर प्रवेश परीक्षा करवायी जाती हैं।

वर्तमान समय में छह सौ से अधिक अभ्यर्थी तकनीकी विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं। विश्वविद्यालय 13 विषयों में विभिन्न टॉपिक पर पीएचडी कराता है। तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीके गर्ग ने बताया कि दिसंबर 2016 में यूजीसी ने यह गाइडलाइन जारी की थी।

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