पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका बाहर, ट्रंप के इस फैसले की पूरी दुनिया कर रही निंदा

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वाशिंगटन| राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि 2015 पेरिस समझौते से अमेरिका बाहर निकल जाएगा। उन्होंने कहा कि वह नए सिरे से एक नया समझौता करेंगे जो अमेरिकी हितों की रक्षा कर सके।

सीएनएन के मुताबिक, यह फैसला उन प्रयासों को झटका है जिसके तहत अमेरिका के इस समझौते से जुड़े रहने पर ट्रंप से निरंतर आह्वान किया जा रहा था। दुनियाभर के 195 देश इस समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।

ट्रंप ने कहा, “अमेरिका और यहां के नागरिकों को सुरक्षित रखने के अपने कर्तव्य को देखते हुए अमेरिका पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकलेगा लेकिन हम अमेरिकी हितों को देखते हुए नए समझौते पर बातचीत करेंगे।”

उन्होंने कहा, “हम इस समझौते से बाहर निकल रहे हैं।”

पूरी दुनिया कर रहा ट्रंप की निंदा

अमेरिका के इस समझौते पर बने रहने के लिए कई विदेशी नेताओं, कारोबारियों और यहां तक की ट्रंप की बेटी ने भी उनसे अनुरोध किया था कि अमेरिका इस समझौते से जुड़ा रहे। यूएस के फैसले की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है। फ़्रांस, जर्मनी, इटली ने यूएस के इस कदम पर एक संयुक्त बयान जारी करके कहा है कि पेरिस जलवायु समझौते पर फ़िर से बातचीत नहीं हो सकती। फ़्रांस के राष्ट्रपति ने कहा है कि इस मसले पर कोई प्लान बी नहीं हो सकता क्योंकि कोई दूसरा प्लेनेट B का हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।

क्या है पेरिस जलवायु समझौता

पेरिस जलवायु समझौता लगभग 200 देशों के बीच में हुआ था। इन देशों ने अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने का निश्चय किया था। पूरे विश्व का में बढ़ते तापमान को 2 डिग्री सेल्सियस तक रोकने के मकसद से यह समझौता हुआ था। ग्रीन हाउस गैसेस के उत्सर्जन में 28% की कमी लाने का निश्चय किया था। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सितंबर 2016 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

समझौते पर भारत के साथ-साथ लगभग 200 देश हस्ताक्षर कर चुके हैं। 4 नवंबर 2016 से यह समझौता लागू भी हो गया। पेरिस समझौते का मुख्य लक्ष्य 2100 तक ग्लोबल वार्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे सीमित रखना था। लेकिन अब अमेरिका के इससे बाहर हो जाने से इसपर बुरा असर पड़ेगा।

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