हाथों से नहीं पैरों से लिखी कॉपी और कर दिया कमाल

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लखनऊ। पैरों से लिखने वाली लड़की पुष्‍पा बहराइच में चर्चा के केन्‍द्र में है। उसने यह जता दिया कि हौसला बुलंद हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है। जरूरी नहीं लिखने के लिए हाथ हों। पैरों से भी लिखा जा सकता है। बहराइच की पुष्‍पा सिंह ने यह कर दिखाया। कई लोग तो उसे पैरों से लिखने वाली लड़की के रूप में जानते हैं। आगे चलकर वह अफसर बनना चाहती है। इपैरादे बुलंद है इसलिए उसने पैरों से ही लिखना सीख लिया। उसके दोनों हाथ नहीं है। अवर अधीनस्‍थ सेवा की प्री परीक्षा में जब बहराइच की पुष्‍पा ने हाथ से नहीं पैर से लिखना शुरू किया तो परीक्षक भी हैरान रहे गए और उसके हौसले को सलाम करने लगे।

पैरों से लिखने वाली लड़की

पैरों से लिखने वाली लड़की स्‍कूल टीचर भी

बहराइच की पुष्पा का कमाल इतना ही नहीं है कि वो पैरों से लिखने वाली लड़की है। वो एक स्कूल टीचर भी  हैं और प्रशास‌निक अफसर बनने की चाहत रखती है। उसके दोनों हाथ नहीं है लेकिन उसने इसे अपने जीवन की मजबूरी नहीं बनने दिया। वह पैर से लिखने का अभ्‍यास करती रही। अब वह पैर से लिख लेती है। लिखने का हौसला भी देखिए कि उसने अफसर बनने की बात ठान ली है। बहराइच की पुष्पा वर्तमान में बीडीसी सदस्य है और एक स्कूल में पढ़ाती है। आत्मनिर्भरता का सबक देने वाली पुष्पा अब प्रशासनिक अफसर बनकर बदलाव लाना चाहती हैं। उसके हौसले को देखते हुए यह कहने में कोई गुरेज नहीं कि वह अपने लक्ष्‍य को जल्‍द हासिल कर लेगी।

जब बीडीसी चुनाव जीती तो पैर से किए थे हस्‍ताक्षर

पंचायत चुनाव में जब बहराइच की पुष्पा स‌िंह बीडीसी का चुनाव जीतीं तो उन्होंने अपने हाथ से नहीं बल्कि पैर से ‌हस्ताक्षर किए थे। पुष्पा सिंह ने श्रावस्ती जिले में क्षेत्र पंचायत सदस्य पद पर जीत हासिल की थी। चुनाव जीतने के बाद पुष्पा ने भीड़ के सामने अपने पैर से हस्ताक्षर किया तो वहां मौजूद सभी लोगों ने जमकर तालियां बजाई थी। दोनों हाथ न होने की पीड़ा कभी उसके चेहरे पर नहीं झलकती। वह अपने इरादों से मजबूत है। यह बात उसके गांव के लोग भी कहते हैं।

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