बाजार जाएं तो साथ ले जाएं पेपर बैग, पॉलीथिन नहीं मिलेगी

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लखनऊ। शहर में गुरूवार से पॉलीथिन पर पूरी तरह प्रतिबंध लग गया है। इस प्रतिबंध को लागू कराने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी नगर निगम और यूपीपीसीबी की होगी। नगर निगम जहां पॉलीथिन जब्त कर जुर्माना लगाएगा। वहीं नोटिफिकेशन के मुताबिक पूरी कार्रवाई की निगरानी और तकनीकी मदद के लिए यूपीपीसीबी के वैज्ञानिक अधिकारी मौजूद रहेंगे। कार्रवाई प्रभावी तरीके से हो इसके लिए डीएम ने खुद कमान संभाल ली है। यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी कुलदीप मिश्र का कहना है कि डीएम ने सभी विभागों की जिम्मेदारी तय कर दी है। अब गुरूवार से कार्रवाई शुरू हो जाएगी। हर जोनल टीम में हमारे विभाग से भी वैज्ञानिक अधिकारी कार्रवाई के समय मौजूद रहेंगे। नगर निगम ही पॉलीथिन जब्त करने का काम करेगा। इसके लिए हर टीम में नगर निगम के प्रतिनिधि की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी।

पॉलीथिन

पॉलीथिन पर लगेगा जुर्माना

 

उधर नगर निगम में भी मंगलवार को अपर नगर आयुक्त विशाल भारद्वाज ने तैयारियों के लिए एक बैठक की। इसमें मौजूद रहे पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण ने बताया कि नगर निगम अनाशित कूड़ा कचरा नियम 2000 के तहत कार्रवाई के लिए डीएम ने निर्देशित किया है। इसमें जुर्माना और दूसरी सजा के लिए विधिक राय ली गई है। इस अध्यादेश के मुताबिक 200 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। प्लास्टिक कचरे के लिए यह सजा पहली बार में अधिकतम पांच हजार रुपये या एक महीने की जेल या दोनों हो सकते हैं। दूसरी बार भी उपयोग करते पकड़े जाने पर 10 हजार रुपये जुर्माना या छह महीने की सजा या दोनों का नियम है।

डीएम ने फिर बुलाई बैठक

 

पॉलीथिन का उपयोग बंद कराने को लेकर विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए डीएम राजशेखर ने बुधवार को सभी विभागों की बैठक बुलाई है। शाम पांच बजे होने वाली इस बैठक में सभी विभागों को अपनी तैयारी के साथ मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है। शासन पॉलीथिन का उपयोग बंद कराने के लिए गंभीर है। मंगलवार को भी खुद प्रमुख सचिव ने सभी जिलों के डीएम को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है। 21 जनवरी से पॉलीथिन कैरीबैग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाएगा।

जानिए क्या है ‘polythene’ और इसके नुकसान

 

पॉलीएथिलीन या पॉलीथीन (Polyethylene या Polythene IUPAC नाम : पॉलीएथीन या पॉली (मेथीलीन)) सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला प्लास्टिक है। वर्तमान में इसका वार्षिक वैश्विक उत्पादन 8 करोड़ टन है। इसका मुख्य उपयोग पैकेजिंग (प्लास्टिक के थैले, प्लास्टिक फिल्में, जीओमेम्ब्रेन, बोतल और अन्य पात्र) बनाने में होता है।

पॉलीथीलीन कई प्रकार के होते हैं जिनमें से अधिकांश का सूत्र (C2H4)nH2 होता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि पॉलीथीन एक ही प्रकार के कार्बनिक यौगिकों का मिश्रण होता है। पॉलीइथिलीन एक बहुलक है। यह इथिलीन के अणु द्वारा बनता है। यह एक बहुउपयोगी पदार्थ है। बायोडिग्रेडेबल नहीं होने के कारण इससे भी पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।

गायों के पेट से निकलती है polythene

 

एससी यादव ने बताया लखनऊ के कान्हा उपवन में हर रोज तीन से छह गायों का पोस्टमार्टम होता है। इनमें कई के पेट में आठ किलो तक पॉलीथिन निकलती है। एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट, 2003 के तहत सूबे में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इसमें केवल 20 माइक्रोन से कम और 20 गुणा 30 वर्ग सेमी साइज से कम की पॉलीथिन ही प्रतिबंधित है। रंगीन पॉलीथिन को रिसाइकिल करने में पर्यावरण को खतरा होता है इसलिए इस पर भी प्रतिबंध है। वहीं खाने का सामान ले जाने के लिए पॉलीथिन बैग पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

स्वास्थ्य के लिए घातक है पॉलीथिन

 

पॉलीथिन कचरे से देश में प्रतिवर्ष लाखों पशु-पक्षी मौत का ग्रास बन रहे हैं। लोगों में तरह-तरह की बीमारियां फैल रही हैं, जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है तथा भूगर्भीय जलस्रोत दूषित हो रहे हैं। प्लास्टिक के ज्यादा संपर्क में रहने से लोगों के खून में थेलेट्स की मात्रा बढ़ जाती है। इससे गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशु का विकास रुक जाता है और प्रजनन अंगों को नुकसान पहुंचता है। प्लास्टिक उत्पादों में प्रयोग होने वाला बिस्फेनॉल रसायन शरीर में डायबिटीज व लिवर एंजाइम को असामान्य कर देता है। महाराजा अग्रसेन अस्पताल के सीईओ डॉ. एमएस गुप्ता का कहना है कि पॉलीथीन कचरा जलाने से कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड एवं डाईऑक्सीन्स जैसी विषैली गैसें उत्सर्जित होती हैं। इनसे सांस, त्वचा आदि की बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है।

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