पोस्टर-बैनर चिपकाने वालों की खैर नहीं

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इलाहाबाद। अब कोई भी सूचना देने वाले साइनबोर्ड पर पोस्टर-बैनर  चिपकाना सभी को महंगा पड़ सकता है।यह निर्देश हाईकोर्ट ने सूबे के उच्च अधिकारियों ने दे दिया है। इस संबंध में परिपत्र जारी कर कार्रवाई करेंगे ।

इतना ही नहीं, दीवारों पर पोस्टर लगाने वाले भी हो जाइये सावधान.इस मामले में हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि दीवारों पर पोस्टर या बैनर लगाने वाले भी कार्रवाई की अन्दर आएंगे। अगर किसी भी कंपनी के नाम का प्रचार सार्वजनिक सूचना पर चिपकाया मिला तो नगर निगम उस व्यक्त से जुर्माना वसूलेगा। 18 सितम्बर 2015 को कोर्ट ने नगर निगम इलाहाबाद के के बाई लॉ को मॉडल के रूप में अपनाते हुए पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्देश दिया है।

 

पोस्टर-बैनर

पोस्टर-बैनर पर लगी रोक

पोस्टर-बैनर , प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग और प्रमुख सचिव जनकार्य विभाग को इन निर्देशों पर जानकारी लेने को कहा है।यह फैसला इसलिए आया है क्योंकि अनुराग मिश्र द्वारा दाखिल जनहित याचिका में सार्वजनिक सूचकों को विज्ञापन चिपकाकर ढंक देने की शिकायत की गई थी। –

मुख्य न्यायमूर्ति डॉ डीवाई चन्द्रचुड़ और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खण्डपीठ ने इस पर संज्ञान लेते हुए व्यापक निर्देश दिए हैं। याचिका में कहा गया है कि किसी सार्वजनिक स्थल कार्यालय या अस्पताल आदि के बारे में आम जनता को जानकारी देने के लिए सड़क पर जनसूचक बोर्ड लगाए जाते हैं, लेकिन इन्हें लोग विज्ञापन या चुनाव संबंधी पोस्टर आदि चिपकाकर ढंक देते हैं।

नगर निगम इलाहाबाद द्वारा दाखिल जवाब में कहा गया है कि निगम ने 18 सितम्बर 2015 को यूपी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट के तहत बाई-लॉ बनाया है जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर या विज्ञापन लगाना, बैनर, होर्डिंग आदि लगाने वालों पर कार्रवाई करने तथा जुर्माना वसूलने का प्राविधान है।

 

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