मदद करके मुश्किल में फंसे कलेक्टर साहब

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भोपाल। जिले में एक शराब ठेकेदार की मदद कर राज्य सरकार को नुकसान पहुंचा कर जिलाधिकारी (कलेक्टर) प्रकाश जांगड़े और आबकारी अधिकारी आर. सी. त्रिवेदी मुसीबत में फंस गए हैं। दोनों अफसरों सहित तीन लोगों के खिलाफ जबलपुर लोकायुक्त ने प्रकरण दर्ज कर लिया है।

सूत्रों के अनुसार, कटनी जिले में वर्ष 2016-17 के लिए शराब के ठेके हुए, कुछ ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए बगैर अमानत राशि जमा किए उन्हें ठेके चलाने की प्रशासन ने अनुमति दे दी। इन ठेकेदारों ने लायसेंस फीस भी अदा नहीं की। ठेकेदारों ने एक अप्रैल से 25 अप्रैल तक दुकानें संचालित की, इससे सरकार को लगभग छह करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

 प्रकाश जांगड़े

सूत्रों ने कहा कि कटनी जिले में इस वर्ष शराब ठेके की नीलामी प्रक्रिया के दौरान ठेकेदारों ने केनरा बैक की 34 डीडी (डिमांड ड्राफ्ट) जमा की थी। इसमें से 13 डीडी पर आबकारी विभाग के खाते में पांच करोड़ रुपये की राशि भी पहुंच गई। बाद में बैंक ने 21 डीडी की राशि जारी नहीं की, उसे इन डीडी में गड़बड़ी की आशंका हुई। जांच में आशंका सही साबित हुई।

इतना ही नहीं बैंक ने पूर्व में जारी राशि को भी आबकारी विभाग से वापस मांगा। केनरा बैंक ने उच्च न्यायालय में भुगतान पर रोक लगाने के लिए एक याचिका दायर की, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इस मामले में दोनों पक्षों -बैंक और आबकारी विभाग- ने अलग-अलग थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।

लोकायुक्त के पुलिस अधीक्षक पी. वी. शुक्ला ने शुक्रवार को कहा कि इस मामले को लोकायुक्त ने स्वयं संज्ञान में लेते हुए जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच के आधार पर जिलाधिकारी जांगड़े व आबकारी अधिकारी त्रिवेदी और शराब ठेकेदार बंसी प्रसाद शुक्ला के खिलाफ गुरुवार को प्रकरण दर्ज किया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि निविदा प्रक्रिया समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी व सचिव आबकारी अधिकारी हैं।

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