विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल पर पकड़ बनाने के लिये बेचैन हुए राजनैतिक दल

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लखनऊ। विधानसभा चुनाव के ऐलान से ठीक पहले सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के महारथियों में पूर्वांचल को लेकर बेचैनी शुरू हो गई है। एक बार फिर पूर्वांचल को लेकर भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस की चिंता जगजाहिर होने लगी है हांलाकि इसका सच मतदाता भलीभांति जानता है।

प्रमुख राजनीतिक दलों

मोदी ने किया आगाज

सदियों से सबसे ज्यादा मुश्किलें और पिछड़ेपन को झेल रहे इस अंचल पर नेताओं की नजरें तभी जाती हैं जबकि चुनाव सिर पर होता है। इस बार भी यह सियायी खेल शुरू हो चुका है। इसका आगाज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक माह पहले गोरखपुर की धरती से कर दिया।

पीएम मोदी जुलाई में गोरखपुर में फर्टिलाइजर कारखाना के पुनरूद्धार कार्य और एम्स के शिलान्यास के लिए आए थे। अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने साफतौर पर संकेत दिया कि जब तक उत्तर भारत और खासकर यूपी के पूर्वी अंचल का विकास नहीं होता, तब तक विकास के रथ के दोनों पहिये संतुलित नहीं रहेंगे। पीएम का दौरा एक तरह से यूपी में चुनावी कार्यक्रम का आगाज था और यह आगाज पूर्वांचल से करके लोगों को संदेश दिया गया कि भारतीय जनता पार्टी को पूर्वी उत्तर प्रदेश की बहुत फिक्र है।

सपा ने भी खेला दाव

प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी पूर्वांचल के लिए समाजवादी पार्टी की तरफ से अनुपूरक बजट में हाल ही में बड़ा दाव खेला है। उन्होंने बजट में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लिए रकम का प्रावधान किया। सरकार ने पांच सालों तक आगरा एक्सप्रेस-वे जैसी पश्चिम की परियोजनाओं पर फोकस रखा। चुनाव से ठीक पहले के बजट में पूर्वांचल के मतदाताओं को रिझाने की कोशिश की गई।

कांग्रेस का खास फोकस

पूर्वांचल के विकास पुरूष स्व. वीर बहादुर सिंह कांग्रेस पार्टी से ही मुख्यमंत्री रहे। इस पार्टी के पास एक ऐसा फेस है जिसे दिखाकर वह पूर्वांचलवासियों को रिझाने की कोशिश करेगी। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की महा पदयात्रा भी पूर्वांचल के देवरिया जनपद से शुरू होने जा रही है। इसका मकसद यह संदेश देना है कि कांग्रेस का फोकस खासतौर पर पूर्वांचल में है। इस बीच, बहुजन समाज पार्टी भी खुद को पूर्वांचल का हितैषी साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। हाल ही में आजमगढ़ में हुई बसपा की रैली में सुप्रीमों मायावती ने पूर्वाचल के पिछड़ेपन का मुद्दा उठाया।

ये हैं पूर्वांचल की मुश्किलें

-उद्योग-धन्धों की कमी

-बंद हो चुकी चीनी मिलें

-इंसेफेलाइटिस का दंश

-रोजगार के लिए पलायन

-अपराध और लोगों की पिछड़ी जीवनशैली

-बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव

-प्रदूषित होती नदियां

 

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