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प्रशांत किशोर को सीएम नीतीश ने दिया कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा

प्रशांत किशोरपटना। बिहार विधानसभा चुनावों में नी‍तीश कुमार के चुनावी कैंपेन को संभालने वाले प्रशांत किशोर को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर का अपना सलाहकार नियुक्‍त किया है। कैबिनेट मंत्री को मिलने वाली हर सुविधा प्रशांत किशोर को भी मिलेगी। इस संबंध में मंत्रिमंडल समन्वय विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है।

प्रशांत किशोर बने मुख्‍यमंत्री के सलाहकार

कंसलटेंट के पद पर नियुक्त प्रशांत किशोर का कार्यकाल अगले आदेश तक के लिए तय किया गया है। वह मुख्यमंत्री को नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित सलाह देने का काम करेंगे।

प्रशांत ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार के लिए रणनीति तैयार करने में अहम रोल निभाया था। इससे पहले लोकसभा चुनावों में उन्होंने नरेंद्र मोदी के भी चुनावी कैंपेन को संभाला था। खबरें ये भी थीं कि पंजाब विधानसभा चुनावों में वे कांग्रेस के प्रचार अभियान की भी कमान संभाल सकते हैं।

कौन हैं प्रशांत किशोर

लोक स्वास्थ्य मामलों के एक्सपर्ट किशोर ने 2011 में संयुक्त राष्ट्र की नौकरी छोड़ दी थी और उन युवा पेशेवरों की टीम में शामिल हुए जिन्होंने करीब तीन सालों तक मोदी के लिए प्रचार किया था। ‘चाय पे चर्चा’ और थ्री डी होलोग्राम प्रचार जैसे कई अभियानों उन्होंने चलाये। मोदी की जीत के हीरो वह रहे। प्रशांत ने 60 अन्य प्रोफेशनल के साथ मिलकर सिटीजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (सीएजी) बनाई थी, जो मोदी के लिए वोट जुटाना और फिर सामाजिक मुद्दों का समाधान करने का काम करती थी।

ये करते हैं काम

प्रशांत राजनीतिक दलों के लिए रणनीति बनाना यानि स्ट्रेटजी मैनेजमेंट करते हैं। उनके साथ ऐसे युवाओं की टीम है जो आईआईएम और आईआईटी किये हुए होनहार हैं।  प्रशांत और उनकी टीम जिस नेता या राजनीतिक दल के लिए काम करती है सबसे पहले लोगों में उसकी छवि अच्छी बनाती है। ऐसे मुद्दे तलाशती है जिन पर चुनाव लड़ा जा सकता है। नेताओं के भाषण तैयार करते हैं।  इसमें ऐसे विषय शामिल करते हैं जिससे बात आम लोगों तक आसानी से पहुँच सके। इसमें विपक्षियों पर हमला बोलना, अपनी उपलब्धियां बताना आदि बातें शामिल रहती हैं।  आज के युग का सबसे बड़ा हथियार सोशल मीडिया का बेहतर ढंग से प्रयोग भी प्रशांत की रणनीति का हिस्सा है।

पहले थे मोदी के साथ

प्रशांत किशोर 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी के साथ थे।  उस समय भाजपा का पूरा चुनावी अभियान प्रशांत की व्यूह रचना पर लड़ा गया था और नतीजे सबने देखे थे कि भाजपा प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई थी।  लेकिन उनका यह साथ भाजपा थिंक टैंक के साथ ज्यादा दिन नहीं चला।  बताया जाता है कि अमित शाह से उनके वैचारिक मतभेद के कारण वह भाजपा की टीम से अलग हो गए।  इसके बाद वह बिहार में नीतीश कुमार के साथ जुड़े।  और उनके चुनाव की कमान संभाली।

ये किया प्रशांत ने बिहार में नीतीश के लिए

नीतीश कुमार के लिए चुनाव कार्यालय कैसा हो, यह तय किया।

पार्टी के प्रचार में चटख पीले और लाल रंगों का प्रयोग बढ़ाया।

बूथ स्तर तक आंकड़े जुटाए। मतदाताओं के घर-घर जाकर मुद्दे तलाशे।

सोशल मीडिया का प्रयोग किया। नीतीश की उपलब्धियां बातें।

नेताओं के सशक्त और प्रभावी भाषण तैयार किये। ताजा मुद्दे जोड़े।

प्रचार के लिए स्लोगन और नारे तैयार किये। उनका बेहतर प्रयोग।

पूरे चुनाव का संचालन, प्लानिंग, क्रियान्वयन दिन-ब-दिन नई रणनीति बनाई।

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