अब प्राइवेट स्कूलों में भी पढ़ाई जाएंगी NCERT की किताबें, नहीं देनी होगी कोई एक्स्ट्रा फीस

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देहरादून। अब प्राइवेट स्कूल मनमाने तरीके से हर साल फीस में वृद्धि में नहीं कर पाएंगे। जी हां, अब उत्तराखंड की नई सरकार अगले सत्र से प्राइवेट स्कूलों की इस मनमानी पर रोक के लिए कानून लाने जा रही है। खबर है कि शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे जल्द ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात कर इस विषय पर बात करेंगे।

प्राइवेट स्कूल

प्राइवेट स्कूल अभिभावकों पर महंगी किताबें लाने का बनाते है दबाव

साथ ही अब सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में एनसीईआरटी और एससीआरटी की ओर से निर्धारित एक समान पाठ्यक्रम भी लागू किया जाएगा। सिर्फ इतना ही नही, शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा है कि कानून आने के बाद कक्षा पांच तक के बच्चों से स्कूल हर महीने 1250 से अधिक फीस नहीं ले सकेंगे।

बता दें, अभिभावक आए दिन कभी स्कूलों की बढ़ती फीस तो कभी बच्चों के कंधो पर बढ़ते बोझ को लेकर चिंतित रहते हैं लेकिन अब प्रदेश सरकार जल्द ही अभिभावकों की चिंताए दूर कर देगी। उन्होंने आगे कहा कि कानून पास होने के बाद अब न सिर्फ निजी स्कूलों द्वारा ली गई मनमानी फीस पर लगाम लगाया जा सकेगा बल्कि स्कूल पांच साल से पहले पाठ्यक्रम में बदलाव भी नहीं कर पाएंगे।

हर बार निजी स्कूल अभिभावकों पर महंगी किताबें लाने का दबाव बनाते थे लेकिन इस कानून के आने के बाद ऐसा कुछ भी नहीं होगा। अगले सत्र से सरकारी और निजी स्कूलों को एससीईआरटी की ओर से किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी।

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने आगे कहा कि कानून बनने के बाद कक्षा आठवीं से नवीं तक के बच्चों से स्कूल 25 हजार और नवीं से बारहवीं तक अधिकतम वार्षिक फीस 30 हजार से अधिक नहीं ले सकेंगे। शिक्षा मंत्री ने निजी स्कूलों में अलग-अलग बोर्ड की मान्यता के बारे में पूछने पर कहा कि जो मनमानी करेंगे और एससीईआरटी की पुस्तकें नहीं चलाएंगे वे स्कूल बंद कर सकते हैं।

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