फरार या बीमार, कोर्ट ने पुलिस से माँगा स्पष्टीकरण

कानपुर। फरार या बीमार शहर पुलिस का एक ऐसा मामला जिसने सुना वह सन्न रह गया। वहीँ कोर्ट तक अचंभित हो गई। मामला शहर के पनकी थाना पुलिस का है। जिसने कोर्ट से जारी हुए रिकवरी वारंट को तामील कराये बगैर आरोपी को फरार घोषित कर दिया। लेकिन जब पुलिस ने कोर्ट को उसके फरार होने की बात बताई तो बात उलटी पड़ गयी। कोर्ट भी पुलिस की बात सुन हैरान रह गयी क्योंकि आरोपी ने पहले ही कोर्ट में अपने फ्रैक्चर होने का प्रार्थना पत्र दे रखा था। कोर्ट ने अब पुलिस से इस खेल का स्पष्टीकरण माँगा है।

फरार या बीमार
पनकी क्षेत्र के गुरुशरण व अरुन लाल आपस में पार्टनर थे। लेकिन फिर दोनों में अलगाव हो गया। जिससे साझे की फर्म में अरुण लाल का पैसा वापस करने के लिए गुरुशरण ने कई चेक से रूपये का भुगतान कर दिया। लेकिन उनमे एक सात लाख की चेक बाउंस हो गई। जब तमाम बार मांगने के बाद अरुण को पैसा नहीं मिला तो उसने न्यायालय की शरण ली।

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फरार या बीमार ऐसे खुली पोल

एसीएमएम 1 कोर्ट से गुरुशरण के खिलाफ रिकवरी वारंट जारी किया गया। वारंट तामीली कराने को लेकर पनकी थाना पुलिस ने खेल कर दिया। उसने बगैर तामीली की जहमत उठाये उसे कोर्ट में फरार बता दिया। लेकिन पुलिस का खेल उस समय सामने आ गया। जिसे देख कोर्ट भी अचंभित हो गई। आरोपी गुरुशरण के वकील ने कोर्ट में पुलिस के रिपोर्ट देने के पहले ही फ्रैक्चर होने का प्रार्थना पत्र दे रखा था। जब आरोपी खुद प्रार्थना पत्र दे रहा है तो फिर वह फरार कैसे हुआ। यह सवाल पुलिस के खेल को उजागर कर रहा था। कोर्ट ने पुलिस से इस करतूत का स्पष्टीकरण माँगा है। मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी। ये तो एक नमूना है पुलिस की कार्यशैली का जो कोर्ट की पकड़ में संयोग से आ गया। वरना खेल चलता रहता।

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