फिल्म रिव्यू : ये फिल्म नहीं आसान बस इतना समझ लीजिए

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फिल्म का नाम: फितूर

डायरेक्टर: अभिषेक कपूर

स्टार कास्ट: आदित्य रॉय कपूर, कैटरीना कैफ, तब्बू , लारा दत्ता भूपति ,अदिति राव हैदरी, राहुल भट, तुनिशा शर्मा

रेटिंग : 2.5

मुंबई। कैटरीना कैफ और आदित्य रॉय कपूर स्टारर फिल्म ‘फितूर’ आज़ रिलीज़ हो गई है। इस फिल्म से दोनों ही स्टार्स को काफी उम्मीदें हैं क्योंकि एक लंबे अर्से बाद दोनों की कोई फिल्म रिलीज़ हो रही है। फिल्म के डायरेक्टर अभिषेक कपूर ने इससे पहले रॉक ऑन और ‘काय पो छे’ जैसे फिल्में डायरेक्ट कर चुके हैं। इस बार अभिषेक ने मशहूर लेखक चार्ल्स डेकन की नावेल ‘द ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स’ से प्रेरित होकर उन्होंने फितूर फिल्म बनायी है। हालांकि इस नॉवेल के प्लाट को कई बार अंग्रेजी फिल्मों में प्रयोग किया गया है, लेकिन पहली बार इस पर आधारित हिंदी फिल्म बनायी गयी है। क्या यह फिल्म दर्शकों को थिएटर तक खींच पाने में सक्षम है? आइये समीक्षा करते हैं –

फितूर

फितूर की कहानी

यह कहानी कश्मीर में शुरू होती हैं जहां बेगम हजरत (तब्बू) अपने बड़े बंगलो में रहा करती हैं, बेगम के साथ विश्वासघात होता है जिसकी वजह से उनका प्यार से विश्वास उठ जाता है, उनकी बेटी फ़िरदौस (कैटरीना कैफ) को बचपन में ही नूर (आदित्य रॉय कपूर) के रूप में एक काम करने वाला दोस्त मिल जाता है। नूर अपने दीदी रुखसार और जीजा जुनैद के साथ रहता है, नूर एक आर्टिस्ट भी है जिसे फ़िरदौस से बचपन में ही मोहब्बत हो जाती है, लेकिन बेगम को नूर का फ़िरदौस से मिलना कतई बर्दाश्त नहीं होता।  जिसकी वजह से बेगम, फ़िरदौस को पढ़ाई के लिए लंदन भेज देती हैं।  नूर अकेला पड़ जाता है, फिर कहानी आगे बढ़ती है और इस लव स्टोरी को एक अंजाम मिलता है। जिसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

स्क्रिप्ट

फिल्म की कहानी कश्मीर की वादियों में बसी हुई है जिसमें वहाँ के लहजे और संवादों को अच्छे ढंग से परोसा गया है। एक तरफ अपने फैसले पर अडिग बेगम हैं तो वहीँ दूसरी तरफ वादी में पनपता प्यार। एक तरफ मुल्क की आजादी का सवाल है तो वहीं इश्क पर लगने वाली पाबंदियां भी दर्शायी गई हैं। लेकिन पूरी फिल्म में स्क्रीनप्ले और कहानी नदारद है। सब कुछ बड़ा ही फोर्सफुल सा दिखाई देता है। फिल्म में अजय देवगन को लिया तो गया है लेकिन उनको दमदार रोल नहीं दिया गया है। तब्बू की अदाकारी तो है लेकिन झटके से उनकी किशोरावस्था के किरदार में अदिति राव हैदरी निभाती हुई नज़र आती हैं जो बड़ा ही अटपटा लगता है। फिल्म में सिर्फ कश्मीर की वादियों को देखना सबसे अच्छा लगता है इसके अलावा और कुछ नहीं। इस कहानी में क्लाइमेक्स भी बहुत ही ढीला है।

एक्टिंग

फिल्म में बेगम के किरदार में तब्बू ने बहुत ही उम्दा एक्टिंग की है। उनकी एक्टिंग बहुत ही रियल लगी है। वहीं आदित्य रॉय कपूर और कैटरीना ने भी सहज अभिनय किया है। फिल्म में अदिति राव हैदरी, लारा दत्ता भूपति, ने भी ठीक ठाक काम किया है लेकिन बचपन के आदित्य रॉय कपूर का किरदार निभाते हुए चाइल्ड आर्टिस्ट ने बहुत ही अच्छा अभिनय किया है।

म्यूजिक

फिल्म की सबसे अच्छी बात इसका म्यूजिक है। अमित त्रिवेदी ने बेहतरीन गाने बनाए हैं। पश्मीना, फितूर, बतियाँ सभी कहानी के साथ बिलकुल फिट बैठते हैं। साथ ही हितेश सोनिक ने बैकग्राउंड स्कोर भी मौके की नजाकत से सही बनाया है।

देखें या नहीं 

फिल्म में देखने लायक सिर्फ कश्मीर की वादियाँ हैं। बाकि तब्बू के अभिनय के दीवाने हैं, या अमित त्रिवेदी का म्यूजिक पसंद है, तो यह फिल्म देख सकते हैं।

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