उत्तराखंड में फ्लोर टेस्ट की उम्मीदें बढ़ी, केंद्र कर रहा है विचार

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फ्लोर टेस्टदेहरादून। मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उत्तराखंड विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराने की सलाह पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस पर अपना पक्ष रखने के लिए शुक्रवार तक का वक्त मांगा है, जिसकी इजाजत सुप्रीम कोर्ट ने दे दी।

फ्लोर टेस्ट पर केंद्र सरकार कर रही है गंभीरता से विचार

केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि उन्होंने बेहद ईमानदारी के साथ अदालत की फ्लोर टेस्ट वाली सलाह को मोदी सरकार के समक्ष रखा है। सरकार इस पर पूरी गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार शुक्रवार तक पीठ के समक्ष अपना पक्ष रख देगी। अटॉर्नी जनरल की दलीलों को स्वीकार करते हुए पीठ ने सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टाल दी।

कांग्रेस को भी नहीं है कोई आपत्ति

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अगर मोदी सरकार अदालत की सलाह मान ले तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार हमारी सलाह मानती है तो यह लोकतंत्र को आगे ले जाने में सहायक होगा। पीठ ने सुनवाई को शुक्रवार तक के लिए टालते हुए कहा कि अगर शुक्रवार तक अटॉर्नी जनरल सरकार की ओर से कोई निर्देश लेकर नहीं आते हैं तो इस मामले पर आगे की सुनवाई होगी।

फ्लोर टेस्ट में सफल हुए बिना नहीं होगी स्थापित रावत सरकार

पीठ ने यह भी कहा कि अगर अदालत ने फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश भी दिया तो भी रावत सरकार स्थापित नहीं होगी, जब तक फ्लोर टेस्ट में वह सफल न हो जाए। इस पर हरीश रावत की तरफ से सिब्बल और सिंघवी ने कहा कि विधानसभा में फ्लोर टेस्ट होना है यानी रावत का विश्वास प्रस्ताव होना है न कि अविश्वास प्रस्ताव।

इस पर अटॉर्नी जनरल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि चूंकि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है लिहाजा रावत खुद को मुख्यमंत्री की तरह पेश नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसी स्थिति है कि दोनों दलों को फ्लोर टेस्ट से गुजरना होगा। जवाब में सिंघवी ने कहा कि शक्ति परीक्षण उस दल का नहीं हो सकता, तो सत्ता में नहीं है। विश्वास प्रस्ताव जिस व्यक्ति को प्राप्त करना है, वह मुख्यमंत्री है।

फ्लोर टेस्ट ही है अंतिम समाधान सुप्रीम कोर्ट

मालूम हो कि उत्तराखंड में फिलहाल राष्ट्रपति शासन लागू है और सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार की उस याचिका पर विस्तृत सुनवाई के लिए तैयार हो गया है जिसमें नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा राष्ट्रपति शासन हटाने के आदेश को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी।

27 अप्रैल को सरकार ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन को जारी रखने का आदेश दिया था। साथ ही शीर्ष अदालत ने फ्लोर टेस्ट पर लगी रोक भी बरकरार रखी थी। पीठ ने इस मसले पर विस्तृत सुनवाई करने का निर्णय लेते हुए सात प्रश्न उठाए थे।

 

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