बंदरों के सामने वन विभाग फेल

रुद्रप्रयाग। बंदरों को इंसान का पूर्वज शायद इसीलिये कहते हैं क्योंकि उसे काफी बुद्धिमान और चतुर समझा जाता है। रुद्रप्रयाग जिले में उत्पाती लेकिन चतुर बंदरों ने इसे साबित भी कर दिया। उन्होंने यहां वन विभाग की प्रशिक्षित टीम को भी मात दे दी। इन्हें पकडऩे में लगी टीम के सदस्यों ने दो दिन में ही उनकी चतुराई के आगे घुटने टेक दिए। हालांकि, इस दौरान पिंजरे में 13 बंदर जरूर फंसे, लेकिन इसके बाद पिंजरे खाली रहने लगे। वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि बंदर अब टीम की कार्यशैली से वाकिफ हो गए हैं। इसीलिए पिंजरे में नहीं फंस रहे, उन्होंने ये भी कहा कि विभाग नये सिरे से उन्हें पकड़ने की रणनीति बनाने जा रहा है।

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बंदरों के आतंक से परेशान हैं लोग

दरअसल, रुद्रप्रयाग जिले में बंदर आतंक का पर्याय बन चुके हैं। अकेले रुद्रप्रयाग शहर में वर्ष 2015 में 18 लोग बंदरों के हमले में घायल हुए थे जिसके बाद स्थानीय लोगों ने कार्रवाई के लिये वन विभाग से गुहार लगाई। वन निदेशालय से मिले निर्देशों के बाद जिले से छह कर्मचारियों को दिसंबर में एक सप्ताह प्रशिक्षण के लिए नैनीताल भी भेजा गया। पिछले सप्ताह बुधवार और गुरुवार को रेंज अधिकारी जे एस नेगी की अगुवाई में टीम ने बंदरों को पकडऩे का अभियान शुरू किया। इसके लिए रुद्रप्रयाग शहर में करीब तीन स्थानों पर पिंजरे लगाए गए। दो दिन तो बंदर पिंजरे में फंसे, लेकिन टीम के अनुसार अब बंदर पिंजरे को दूर से ही ठेंगा दिखा रहे हैं। बंदरों के स्वभाव में आए बदलाव के बाद टीम पिंजरों को लेकर अगस्त्यमुनि चली गई है।

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उप प्रभागीय वनाधिकारी सोबन लाल ने बताया कि बंदरों को पकड़ने का अभियान ट्रायल के तौर पर चला था, लेकिन बंदर तेजी के साथ परिस्थितियों का आंकलन कर लेते हैं जो कि उन्होंने किया। अब अभियान को तीन चार दिन बाद पूरे जिले में दोबारा शुरू किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि नया अभियान शुरु होने तक बंदर काफी कुछ भूल चुके होंगे, और इसका फायदा वन विभाग को जरूर मिलेगा।

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