बच्चे को बचाने के लिए दस ने कुर्बान की जिंदगी

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बंदर का बच्चादेहरादून। कहा जाता है कि जानवरों में समझ नहीं होती। लेकिन इस घटना के बाद सभी इंसान को इससे सीख लेनी चाहिए। जहां एक बंदर का बच्चा मौत के मुह में से निकलने की कोशिश में दस बंदरों ने अपनी जान दे दी। यह घटना चंपावत के लोहाघाट रोडवेज कार्यशाला की है। यहां बने पानी के टैंक में डूबते बंदर के बच्चे को बचाने में दस बंदरों की मौत हो गई।

बंदर का बच्चा टैंक में गिरा था

रोडवेज कार्यशाला में बने पानी में एक बंदर का बच्चा गिर गया था। जिसे बचने के लिए दस बंदरों ने अपनी जान दे दी। वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर सभी मृत बंदरों को टैंक से बाहर निकाला। पोस्टमार्टम के बाद उन्हें रोडवेज कार्यशाला परिसर में दफना दिया।

एक बंदर का बच्चा अपनी मां से बिछड़ कर छमनियां स्थित रोडवेज कार्यशाला परिसर में वाहनों की साफ-सफाई के लिए बने पानी के टैंक में गिर गया। जिसे बचाने की खातिर अन्य सभी बंदर टैंक में कूद गए।

हालांकि टैंक में पानी करीब तीन फिट था, लेकिन टैंक की करीब 10 फिट की गहराई होने के कारण कोई भी बंदर वहां से निकल नहीं पाया। काफी देर तक टैंक में फंसे रहने के कारण टैंक में डूबे सभी 10 बंदरों की मौत हो गई।

वन विभाग को जानकारी मिलने के बाद विभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी महिपाल सिंह सिरोही और लोहाघाट क्षेत्र के रेंजर दीप जोशी के नेतृत्व में गई। टीम ने रोडवेज परिसर में जाकर बंदरों को पानी से बाहर निकाला। इसके बाद सभी बंदरों का पोस्टमार्टम किया गया।

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