Bakrid Special : कुर्बानी के जरिये प्रेम का संदेश देती है बकरीद

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नई दिल्ली। देश और दुनिया भर में बकरीद धूम-धाम से मनाई जाती है। इस त्यौहार को ईद-उल-ज़ुहा भी कहते हैं। भारत में ईद-उल-ज़ुहा पर्व 13 सितंबर को मनाया जाएगा। वैसे तो मुसलमान साल में सिर्फ दो त्यौहार मनाते हैं ईद और बकरीद। ईद को हम मीठी ईद भी कहते हैं इस दिन समाज में प्रेम की मिठास घोलने का संदेश देती है।

बकरीद

बकरीद के दिन अल्लाह की राह में देते हैं कुर्बानी

ईद-उल-ज़ुहा या बकरीद का दिन फर्ज़-ए-कुर्बान का दिन होता है। ज्यादातर मुस्लिम समाज में बकरे को पाला जाता है। जब वह बड़ा हो जाता है उसे ईद-उल-ज़ुहा के दिन अल्लाह के लिए कुर्बान कर दिया जाता है।

बकरीद के दिन इन बातों का रखें ध्यान

बकरीद के दिन कुर्बानी दी जाए इसके लिए भी कड़े कानून हैं… जैसे कि कुर्बानी ईद की नमाज के बाद की जाती है। इससे पहले कुर्बानी देने का कोई अर्थ नहीं है।

कुर्बानी के बाद मांस के तीन हिस्से होते हैं। एक खुद के इस्तेमाल के लिए, दूसरा गरीबों के लिए और तीसरा संबंधियों के लिए। वैसे, कुछ लोग सभी हिस्से गरीबों में बांट देते हैं।

बकरीद के पीछे है ये हदीस

एक हदीस के मुताबिक इब्राहीम अलैय सलाम को ख्वाब (सपने) में हुक्म हुआ कि वह अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान कर दें। जिसके बाद उन्होंने अपने सारे पैसे सोने, चांदी सब गरीबों में बांट दिए

दूसरे दिन उन्हें फिर वही ख्वाब आया। इस बार उन्होंने सारे जानवर अल्लाह के राह में कुर्बान कर दिए।

तीसरे दिन उन्हें फिर यही ख्वाब आया कि आप अपनी सबसे प्यारी चीज अल्लाह के राह में कुर्बान कर दो। उसके पास अब कुछ नहीं बचा तब उन्होंने सोच की मेरी सबसे प्यारी चीज मेरा औलाद है।

इब्राहीम अलैय सलाम अल्लाह के हुक्म से अपने प्यारे बेटे इस्माइल को कुर्बान करने  के  लिए मान गए।

इसलिए उन्होंने सिर्फ अल्लाह के हुक्म को पूरा करने के लिए अपने बेटे की कुर्बानी देने को तैयार हो गए। लेकिन अल्लाह भी रहीमो करीम है और वह अपने बंदे के दिल के हाल को बाखूबी जानता है।

इस हदीस के मुताबिक जैसे ही इब्राहीम अलैय सलाम छुरी लेकर अपने बेटे को कुर्बान करने लगे। वैसे ही फरिश्तों के सरदार जिब्रील अमीन ने बिजली की तेजी से इस्माईल अलैय सलाम को छुरी के नीचे से हटाकर उनकी जगह एक मेमने को रख दिया।

इस तरह इब्राहीम अलैय सलाम के हाथों मेमने के जिबह होने के साथ पहली कुर्बानी हुई। इसके बाद जिब्रील अमीन ने इब्राहीम अलैय सलाम को खुशखबरी सुनाई कि अल्लाह ने आपकी कुर्बानी कुबूल कर ली है और अल्लाह आपकी कुर्बानी से राजी है। इसलिए तभी से इस त्यौहार पर अल्लाह के नाम पर एक जानवर की कुर्बानी दी जाती है। उसके बार इब्राहीम अलैय सलाम के बेटे इस्माइल पैगंबर हुए।

 

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