बकरी मरी या बकरा, उलझ गया प्रशासन

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कानपुर। शहर की परेड बाजार में आगजनी की घटना में एक बच्ची के साथ-साथ कुछ बकरियां भी जल कर मर गई थी। पीड़ितों को मुआवजा देना था। एक व्यक्ति की तीन बकरियां भी मरी थी। अब मरने वाली बकरियां थी या बकरा, इस उलझन ने अधिकारीयों को परेशान कर दिया। क्योंकि केवल बकरी के मरने पर मुआवजे का प्रावधान है। बाद में जब डॉक्टर ने चेक कर के प्रमाणपत्र दिया तब जाकर अधिकारीयों की उलझन खत्म हुई।

बकरी

बकरी या बकरा ?

मालूम हो कि शुक्रवार की रात परेड की अस्थाई बाजार में आग लगने से सौ से अधिक दुकाने जल गई थी। इस हादसे में एक 14 वर्षीय बच्ची भी जल गई थी। आग में शमीम के तीन जानवर (बकरी या बकरा) जल गए थे। एसडीएम और तहसीलदार को पीड़ितों को मुआवजे का चेक तैयार करना था। शासनादेश देख अधिकारी चौंक गए। उसमे लिखा था कि बकरी की ही मौत पर दो हजार मुआवजा दिया जा सकता है। अधिकारी यह नहीं तय कर पा रहे थे कि जल कर मरने वाले बकरे थे कि बकरी।

प्रमाण पत्र के बाद खत्म हुई उलझन

यदि बकरियां मरी तो मुआवजा और यदि बकरे मरे तो मुआवजा नहीं मिलना चाहिए। वहीं शमीम बकरियां मरने का दावा कर रहा था। उसने यह भी बताया कि बकरियों के बीमार होने पर किस अस्पताल में इलाज कराया था। जब उस अस्पताल के डॉक्टर ने बकरियां होने का प्रमाणपत्र दिया। तब कहीं अधिकारीयों की उलझन खत्म हुई। उन्होंने दो हजार प्रति बकरी के हिसाब से तीन बकरियों का छह हजार रूपये का चेक शमीम के नाम तैयार कराये। एडीएम ने पीड़ित को चेक वितरित किये। वहीँ जो लड़की मरी थी उसकी माँ सोमवती को तीन लाख का चेक दिया गया। जिला प्रशासन एक लाख पहले भी दे चुका था।

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