बड़ा खुलासा : चुनाव आयोग ने मोदी सरकार की नहीं मानी बात, VVPAT मशीन को लेकर रखी थी ये मांग

नई दिल्ली। पिछले दिनों जिस तरह से कई राज्यों के चुनाव नतीजे आए, उसके बाद तमाम राजनीतिक दलों ने ईवीएम पर सवाल खड़े किए थे। ऐसे में ईवीएम मशीन को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग से VVPAT मशीन किसी प्राइवेट कंपनी से खरीदने का सुझाव दिया था लेकिन चुनाव आयोग ने सरकार के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

चुनाव आयोग ने सरकार की मांग को ये कहते हुए ठुकरा दिया कि किसी प्राइवेट कंपनी से वीवीपीएटी खरीदना सही नहीं है। ऐसा करने से जनता के विश्वास को ठेस पहुंच सकता है। ऐसे में वीवीपीएटी को पब्लिक कंपनियां जो पहले से इसे बनाती आ रही हैं, सिर्फ उन्हीं से बनवाया जाए।

आपको बता दें कि ईवीएम और वीवीपैट मशीन को शुरू से भारत में दो ही सरकारी उपक्रम सप्लाई करते हैं, जिसमे भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड जोकि बेंगलुरू में स्थित है और दूसरा इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड हैदराबाद शामिल है। इन दोनों कंपनियों के अलावा चुनाव आयोग किसी अन्य प्राइवेट कंपनी से यह मशीन नहीं लेता है। वीवीपैट मशीन के जरिए मतदाता जब वोट देता है तो उसकी एक रसीद प्रिंट होती है, जोकि भविष्य में किसी भी विवाद से निपटने के लिए काफी अहम साबित हो सकती है।

बताया जा रहा है कि साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए चुनाव आयोग भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटिड (बीईएल) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटिड (ईसीआईएल) को करीब 14 लाख वीवीपीएटी बनाने का ऑर्डर दे चुका है।

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