बदायूं अपहरण कांड की जांच सीबीआई के हवाले

इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से युवक के अपहरण मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया है।

याची का आरोप है कि आरोपित के परिवार से कई लोग आईपीएस और पीपीएस हैं जिसकी वजह से उसे न्याय नहीं मिल पा रहा है। मामले को उलझाने में पूरा कुनबा लगा है। जिस वजह से जांच प्रभावित हो रही है। जांच के लिए जिस अधिकारी को  भी लगाया जाता है, उसे ये लोग प्रभावित कर देते हैं। हाईकोर्ट ने जांच कार्य सीबीआई को सौंपते हुए एक माह के अन्दर जांच रिपोर्ट देने का निर्देश दिया हैं। साथ ही पूर्व में हुई जांच की रिपोर्ट और वर्क रिपोर्ट में कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश जारी किया है।

बदायूं

बदायूं कांड क्या कहना है मां का

अपहृत युवक की मां सत्यवती की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति विजय लक्ष्मी की बेंच ने यह निर्णय दिया। याची सत्यवती का कहना है कि  बेटे के अपहरण का आरोपी मनफूल सिंह खुद ऊंची पहुंच वाला व्यक्ति है, उसका छोटा भाई पीपीएस है और बेटा पुलिस इंस्पेक्टर है, बहन का लडक़ा आईपीएस है। इसके अलावा उसका एक रिश्तेदार एसएसपी है। इन सबके प्रभाव का इस्तेमाल  कर मामले की जांच नहीं होने दी जा रही है।

अपहृत युवक की मां ने कहा कि इन दबावों की वजह से उसे न्याय मिलने की उम्मीद नहीं हो रही है। बेटे का अपहरण हुए डेढ़ साल हो गया और पुलिस अभी तक उसे बरामद नहीं कर पायी है। न ही आरोपितों के विरूद्ध कोई कार्रवाई ही कर पायी है। पुलिस कार्रवाई भी पता ही नहीं चल पा रही है। जिला न्यायलय से कुर्की कार्रवाई का आदेश हुआ उस पर भी अमल नहीं किया गया। इन सब तथ्यों को सुनते हुए उच्च न्यायालय ने मामले से सम्बन्धित सभी कागजात सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया है। जांच रिपोर्ट भी तलब की।

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