खा खा खैया का मतलब बताओ तो मानें विद्वान हो

0

बनारस के ठग पूछते थे कि खा खा खैया का मतलब बताओ तो मानें तुम बहुत बड़े विद्वान हो। और जो न बता पाये उसको बनारसी ठग लूट लिया करते थे। ये बात कानपुर के लुटेरे सिपाहियों पर बिल्कुल फिट बैठ रही है। सिपाहियों ने कोचिंग शिक्षक से इससे मिलता जुलता ही सवाल पूछा था कि लोटा लुढ़कते लुढ़कते लुढ़क गया। इस वाक्य का अनुवाद करो। बेचारे शिक्षक की बुद्धि घूम गयी और सिपाहियों ने उसे लूट लिया।

बनारस के ठग

बनारस के ठग पीछे ये सिपाही आगे

ये बनारसी ठग पुलिस में कैसे भर्ती हो गये। इस खबर से तो कुछ ऐसा ही लग रहा है। बनारस के ठगों के वैसे तो बहुत से किस्से मशहूर हैं लेकिन यह किस्सा इन सिपाहियों की हरकत पर बिल्कुल फिट बैठता है।

बनारस प्राचीन काल से शिक्षा का बहुत बड़ा केन्द्र रहा है। काशी से पढ़ कर निकले छात्रों को विद्वान माना जाता था। ऐसे ही एक सीधा छात्र जब काशी से पढ़ लिखकर कुछ कमा धमा कर घर के लिए चला तो रास्ते में ठग मिल गये। उन्होंने कहा कि हमारे पंडित जी से शास्त्रार्थ करो। अगर तुम जीत गये तो पंडित जी के पास जो कुछ है तुम्हारा अगर हार गये तो तुम्हारा सब सामान हमारा। छात्र थोड़ा विद्वता के घमंड में था। वह तैयार हो गया।

शास्त्रार्थ शुरू हुआ पंडित जी ने उससे पूछा खा खा खैया। छात्र की कुछ समझ में नहीं आया उसने दोबारा पूछा तो उन्होंने सवाल दोहरा दिया। छात्र निरूतर। पंडित जी का जयकारा हुआ इसका सब सामान छीन लिया गया।

घर पहुंचा तो बहुत उदास बड़े भाई ने पूछा कि इतने साल बाद घर आए हो और इतना उदास हो क्या बात है तो बहुत दुखी मन से पूरी बात बता दी। उन्होंने कहा बस इतनी सी बात चलो कल फिर वहीं चलते हैं। ढेर सारा सामान लाद कर वह गाड़ी में बैठकर फिर वहीं पहुंचे। उनको भी वही चुनौती मिली उन्होंने स्वीकार कर लिया। शास्त्रार्थ शुरू हुआ पंडित जी ने उनसे भी पूछा खा खा खैया। वह उठे पंडित जी को एक झापड़ लगाया बेवकूफ सीधे खा खा खैया। अब पंडितजी की बुद्धि घूम गयी बोले तुम्हीं बताओ। तो वह बोले। पहले बुवम बुवैया, फिर जुतम जुतैया, फिर कटम कटैया, फिर पकम पकैया तब खा खा खैया। और वह अनपढ़ देहाती बड़ा गुरु घंटाल ठग को हरा कर सब जीत लाया।

लुटेरे सिपाहियों को भी ऐसे ही विद्वान की तलाश थी। खैर अब जेल जाकर सोचेंगे नया तरीका।

 

loading...
शेयर करें