कांग्रेस नेता और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ का निधन

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नई दिल्ली। कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता एवं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ का बुधवार को निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे। 23 अगस्त, 1923 को पंजाब राज्य के फिरोजपुर जिले में पंचकोसी गांव में जन्मे डॉ. बलराम जाखड़ को लगातार दो बार सर्वसम्मति से लोकसभा स्पीकर चुने जाने के लिए याद किया जाता है। वह एक किसान से राजनीतिज्ञ बने थे। वह सातवीं लोकसभा में निर्वाचन के तुरंत बाद लोकसभा अध्यक्ष के लिए चुने गए थे। डॉ. जाखड़ को अंग्रेजी, संस्कृत, हिन्दी, उर्दू और पंजाबी का गहन ज्ञान था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलराम जाखड़ के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह एक लोकप्रिय नेता थे, जिन्होंने संसदीय लोकतंत्र को समृद्ध बनाया।

बलराम जाखड़ का राजनीतिक सफर

बलराम जाखड़बलराम जाखड़ वर्ष 1980 से 1989 तक लोकसभा के अध्यक्ष रहे थे और इस दौरान उन्होंने संसद संग्रहालय की स्थापना में भी योगदान दिया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के कैबिनेट में कृषिमंत्री के तौर पर भी सेवाएं दीं। बलराम जाखड़ 30 जून, 2004 से 30 मई, 2009 तक मध्य प्रदेश के राज्यपाल भी रहे।

 

फॉरमेन क्रिश्चियन कॉलेज, लाहौर से संस्कृत ऑनर्स में ग्रेजुएशन करने के बाद भी उन्होंने खेती किसानी में अपनी दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने अपनी जमीन पर फलों और अंगूरों के बागों के विकास के लिए आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया। इसके लिए वर्ष 1975 में उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा “ऑल इंडिया उद्यान पंडित” की उपाधि प्रदान की गई।

कृषि के क्षेत्र में उनके योगदान को मान्यता प्रदान करते हुए उन्हें हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार और गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार ने क्रमशः उन्हें “डाक्टर ऑफ साइंस” और “विद्या मार्तण्ड” की मानद उपाधियां दी थीं। इसके बाद ही उन्होंने अपना राजनीतिक सफर शुरू किया।

डॉ. जाखड़ ने साल 1972 में पंजाब विधान सभा से चुने गए। विधान सभा के लिए उनके निर्वाचन के एक वर्ष के भीतर ही उन्हें सहकारिता, सिंचाई और विद्युत उपमंत्री के रूप में मंत्रिपरिषद में शामिल कर लिया गया। वह वर्ष 1977 तक मंत्री रहे। वर्ष 1977 में विधान सभा के लिए पुनः निर्वाचित होने पर उन्हें कांग्रेस (इ.) विधान मंडल पार्टी के नेता के रूप में चुन लिया गया और उस हैसियत से उन्हें पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता प्राप्त हुई। इस पद पर वह जनवरी 1980 में तब तक रहे जब उन्हें फिरोजपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से सातवीं लोक सभा के लिए चुना गया।

जाखड़ को 22 जनवरी, 1980 को सातवीं लोक सभा का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। उन्होंने सदन की कार्यवाही का जिस तरीके से चलाई उसकी सराहना हुई। दिसम्बर 1984 के आम चुनाव में वह फिर राजस्थान के सीकर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीते और फिर उन्हें आठवीं लोकसभा का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया।

भारतीय संसद में समिति प्रणाली को नया रूप देने में जाखड़ ने अहम प्रयास किए। इसके अलावा संसद सदस्यों के लिए सेवाओं के कम्प्यूटरीकरण तथा स्वचालन प्रणाली की शुरूआत भी जाखड़ के अध्यक्ष रहते हुए ही हुई थी। उन्होंने सदस्यों के हित के लिए संसदीय ग्रंथालय और इसकी शोध, सन्दर्भ, प्रलेखन और सूचना सेवाओं के विस्तार में भी रूचि दिखाई।

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