बाबा केदार ने ओढ़ी सफेद चादर 

रुद्रप्रयाग। तीन साल पहले इस सदी की सबसे बडी जलप्रलय के दौरान पूरे विश्व ने केदारनाथ की पवित्र घाटी में प्रकृति के रौद्र रूप को देखा था। हालांकि भक्ति आस्था और विश्वास के सामने मनुष्य ने हमेशा शीश झुकाया है, और शायद यही वजह है कि आज बाबा केदार का धाम पहले से ज्यादा सुरक्षित और मनोहारी स्वरूप में एक बार फिर सबके सामने है।

सोनप्रयाग, रामबाड़ा, गौरीकुण्ड जो उस साल आये जलप्रलय में पूरी तरह तबाह हो गए थे। आज एक बार फिर पर्यटकों के स्वागत के लिये तैयार दिख रहे हैं।

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बाबा केदार में दिख रहे मनोरम दृश्य 

हाल ही में हुई ताजा बर्फबारी ने केदारनाथ के चारों तरफ के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों को सफेद चादर में समेट लिया है। इससे पूरी घाटी में मनमोहक छटा तो बिखेरी ही है, अद्भुत नजारा भी देखने को मिल रहा है।

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विपरीत परिस्थितियों में भी नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के जुझारू सदस्यों के बुलंद इरादे और जज्बे का जोर ही है, जिसने इतने कम समय में केदारनाथ को नई सूरत देने में इतनी कामयाबी हासिल की।

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देशी-विदेशी पर्यटकों ने पिछले साल चार धाम की यात्रा में बढ़चढ़ कर भाग लिया और बाबा केदारनाथ के दर्शन कर पुण्य लाभ हासिल किया।

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हवाई मार्ग से केदारनाथ की यात्रा भले ही कुछ घंटों मे पूरी हो जाती हो। लेकिन बर्फीली घाटियों से जब हेलीकॉप्टर गुजरता है तो पर्यटकों की खिड़कियों से झांकती आंखे इन खूबसूरत नजारों को हमेशा के लिए अपनी यादों में बसा लेना चाहती हैं।

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केदारनाथ में तीन साल बाद दिखी हिमालयी लोमड़ी

अच्छी बर्फबारी का एक फायदा ये भी होता है कि ऊंचाई वाले स्थानों पर रहने वाले जंगली जानवर भी आसानी से नजर आ जाते हैं। बर्फ से ढ़के केदारनाथ में भी तीन साल बाद एक बार फिर हिमालयी लोमड़ी नजर आई। इससे पहले यह लोमड़ी 2012 के आखिर में दिखायी दी थी।

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केदारनाथ में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के बेस कैंप के पास लगे क्लोज सर्किट कैमरे में हिमालयी लोमड़ी के फुटेज दिखायी दिये। बता दें कि रेड फाक्स के नाम से जाने जानी वाली हिमालयी लोमड़ी आमतौर पर आठ हजार फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर पायी जाती है। उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में भी यह लोमड़ी मिलती है।

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