बायो टॉयलेट मेला में इस बार

इलाहाबाद। मेला प्रशासन ने मेले में इस बार बायो टॉयलेट लगाने का फैसला किया है। जिला मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने बताया कि मकर संक्रांति से शुरू होकर एक महीने तक चलने वाले माघ मेले में सभी सुविधाओं से मेला परिसर को मुस्तैद किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लाखों तीर्थ यात्रियों को पूरे एक महीने तक साफ टॉयलेट उपलब्ध करवाने की होती है। हर साल माघ मेले में सैकड़ों अस्थाई शौचालय  बनाए जाते हैं। लेकिन साफ-सफाई को लेकर यह योजना हर साल असफल हो जाती है। लेकिन इस बार आईआईटी कानपुर ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत माघ मेले में बायो टॉयलेट लगाने के लिए सवा करोड़ रुपए का प्रस्ताव दिया है जिससे तीर्थयात्रियों को स्वच्छ टॉयलेट देना संभव लग रहा है। यह प्रोजेक्ट लगभग मात्र सवा करोड़ का है।

बायो

नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत बनेगा शौचालय

गंगा को स्वच्छ एवं निर्मल रखने के लिए केन्द्र सरकारी की ओर से संचालित नमामि गंगे प्रोजेक्ट शूरू किया गया है। इलाहाबाद के मुख्य स्वास्थ्य और चिकित्सा अधिकारी पद्माकर सिंह आईआईटी के सिविल इंजीनियरिंग के विशेषज्ञों द्वारा बनाए प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए सक्रिय हैं।

बायो टॉयलेट का अपशिष्ट पानी बन जाएगा गैस

मेला क्षेत्र में लगने वाले बायो टायलेट में गिरने वाला पानी गैस बनकर उड़ जाएगा। जानकारी के मुताबिक आईआईटी द्वारा विकसित बायो टॉयलेट में अपशिष्ट पानी  गैस में परिवर्तित हो जाता है। इको फ्रैंडली तरीके से एक खास तरह का बैक्टीरिया अपशिष्ट को टैंक में ही मीथेन और पानी में बदल देता है।

इस तरह से माघ मेला में आने वाले तीर्थयात्री निश्चन्त भाव से इन शौचालयों का इस्तेमाल कर सकेंगे और न तो गंदगी उस समय होगी न ही मेला समाप्त होने के बाद गंदगी के निस्तारण की समस्या रह जाएगी। यह गंदगी गंगा में जाकर उसे मैला भी नहीं करेगी।

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