बिहार टॉपर्स कांडः रैकेट में शामिल थीं जेडीयू नेता उषा सिन्हा

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पटना। बिहार टॉपर्स कांड में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। मामले की एसआइटी जांच के प्रमुख मनु महाराज ने कहा कि इस घोटाले में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद की पत्नी भी ऐसे ही रैकेट में शामिल थीं। लालकेश्वर प्रसाद की पत्नी उषा सिन्हा कोई और नहीं बल्कि जेडीयू की पूर्व विधायक हैं। उन्हें इस बार जेडीयू से टिकट नहीं मिला था।

बिहार टॉपर्स कांड

बिहार टॉपर्स कांड में लालकेश्वर की पत्नी और जेडीयू की पूर्व विधायक हैं उषा

एसआइटी के छापे में रविवार को लालकेश्वर प्रसाद और उषा सिन्हा के दो दलाल संदीप झा और अजीत भी पकड़े गए थे। उनसे पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इस रैकेट का जाल सिर्फ वैशाली के विशुनराय कॉलेज तक ही नहीं बल्कि कई और कॉलेजों तक फैला हुआ है। छापेमारी में दोनों आरोपियों के घर से संस्कृत बोर्ड की कई कॉपियां मिली. जहां पहले फेल और बाद में पैसे लेकर पास कराया जाता था।

टॉपर्स केस में अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी

उषा सिन्हा संस्कृत बोर्ड में मेंबर थीं। इन दोनों आरोपियों ने उषा सिन्हा को भी रैकेट में शामिल बताया है। पटना पुलिस ने बिहार टॉपर्स कांड में उषा सिन्हा को भी आरोपी बनाया है। साथ ही उनकी गिरफ्तारी की कोशिशें भी तेज कर दी है। इस मामले में अब तक कुल आठ लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

लालकेश्वर-उषा के घर तक थी दलालों की पहुंच

पूछताह में ये साफ हुआ कि बच्चा राय, लालकेश्वर प्रसाद और उषा सिन्हा का खासमखास था। उसकी पहुंच सिर्फ दफ्तर तक सीमित नहीं थी। वह इनके घर भी आया-जाया करता था. फिलहाल दोनों पति-पत्नी फरार है। पुलिस लगातार उनकी तलाश कर रही है। इनसे पूछताछ के बाद पुलिस और खुलासा होने का दावा कर रही है।

गिरिराज सिंह के साथ बच्चा राय की तस्वीर

दूसरी ओर बच्चा राय की नेताओं से नजदीकी का बिहार टॉपर्स कांड गरमाता जा रहा है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने ट्विटर पर एक साथ बच्चा राय की कई तस्वीरें पोस्ट की हैं। इनमें बच्चा राय केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के साथ दिखाई दे रहा है। इस पोस्ट को बच्चा राय एक चुनावी सभा में लालू के मंच पर दिखने की तस्वीर का जबाब माना जा रहा है।

228 मान्यता प्राप्त बीएड कॉलेज की होगी जांच

दूसरी ओर प्रदेश के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने बताया कि हम मान्यता प्राप्त 228 निजी बीएड कॉलेजों की भी स्क्रूटनिंग करवा रहे हैं। जिला प्रशासन को इसके लिए निर्देश दे दिए गए हैं। इसके लिए पांच मानकों के आधार पर जांच की जाएगी। इनमें मान्यता, अनुदान, आधारभूत संरचना, शिक्षकों की योग्यता और मैनेजमेंट से जुड़े मसले शामिल होंगे।

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