Shaktiman की टांग तोड़ने वाले विधायक गणेश जोशी को नहीं बख्शा हाईकोर्ट ने

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देहरादून। बीजेपी प्रदर्शन में पुलिस के घोड़े शक्तिमान की टांग टूटने के मामले में गिरफ्तार किए गए बीजेपी एमएलए गणेश जोशी को विकासनगर कोर्ट में पेश किया गया। जहां से कोर्ट ने बीजेपी एमएलए को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में 31 मार्च तक जेल भेज दिया। इस बीच, नैनीताल हाईकोर्ट ने भी बीजेपी एमएलए गणेश जोशी को विधानसभा सत्र में भाग लेने से जुड़ी जनहित याचिका को खारिज कर दिया। उधर, बीजेपी एमएलए की गिरफ्तारी के खिलाफ पूरे राज्य में बीजेपी कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। विकासनगर में भी कोर्ट में पेशी के दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इससे पहले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल केके पाल और डीजीपी बीएस सिद्धू से मुलाकात कर गिरफ्तारी पर विरोध जताया था।

 
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बीजेपी एमएलए की गिरफ्तारी के बाद हुआ था मेडिकल

बीजेपी एमएलए जोशी को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस सहसपुर थाने में ले गई। वहीं उनका मेडिकल भी कराया गया। प्रदेश में हंगामे और प्रदर्शन की आशंका के चलते पुलिस ने जोशी को विकासनगर में एसीजेएम सिविल जज सीनियर डिविजन लक्ष्मण सिंह की अदालत में पेश किया। जहां से कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में 31 मार्च तक जेल भेज दिया। शक्तिमान मामले में ही दून पुलिस ने हल्द्वानी से भाजयुमो नेता प्रमोद बोरा को भी गिरफ्तार किया था। सभी पर आरोप है कि इन नेताओं ने घोड़े के आगे लाठियां फटकारीं जिसकी वजह से  शक्तिमान गिर गया और उसकी टांग टूट गई।

नैनीताल हाईकोर्ट ने खारिज की गणेश जोशी की याचिका

नैनीताल हाईकोर्ट ने भी बीजेपी एमएलए गणेश जोशी को करारा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने जोशी की ओर से दायर उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें विधानसभा सत्र में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की थी। याचिका पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश केएम जोजेफ और न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ में हुई।

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गिरफ्तारी पर विधानसभा में भी हुआ था हंगामा

इससे पहले उत्तराखंड विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने बीजेपी विधायक जोशी की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया। भाजपा विधायकों ने इस प्रकार  की गिरफ्तारी को अनुचित करार दिया। उन्होंने स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल से भी मुलाकात की। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि करीब सौ लोग सादी वर्दी में आए और जोशी को जबरन उठाकर ले गए। उन्होंने कहा कि सदन चल रहा है, ऐसे में स्पीकार की अनुमति के बिना गिरफ्तारी नहीं हो सकती। जिसपर स्पीकर कुंजवाल ने कहा कि गंभीर आरोपों में स्पीकर की अनुमति की जरूरत नहीं होती है।

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