फिर बागी हुए वरुण, बोले- मोदी सरकार में सबसे ज्यादा मरे किसान, माल्या करोड़ों लेकर भागा

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इंदौर। सुल्तानपुर से सांसद और बीजेपी नेता वरुण गांधी ने मंगलवार को इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान मोदी सरकार पर जमकर हल्ला बोला। अपने भाषण में उन्होंने मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां सपा, कांग्रेस और बीजेपी पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार में जुटी है, लेकिन बीजेपी के कद्दावर नेता वरुण गांधी अब तक चुनाव में कहीं नजर ही नहीं आए और उन्हें बीजेपी की स्टार प्रचारकों की सूची में कहीं तरजीह भी नहीं मिली थी। वरुण ने हर उस मुद्दे पर बात की जो मोदी सरकार के लिए कमजोर नस मानी जाती है। इस दौरान उन्होंने हैदराबाद यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट रोहित वेमुला का मुद्दा भी उठाया।

बीजेपी नेता वरुण गांधी

बीजेपी नेता वरुण गांधी ने रोहित वेमुला के सुसाइड को लेकर सरकार पर किया प्रहार

वरुण ने कहा कि पिछले साल हैदराबाद में दलित पीएचडी स्टूडेंट रोहित वेमुला ने अपनी जान दे दी। जब मैंने उसकी चिट्ठी पढ़ी, तो मुझे रोना आ गया. इस चिट्ठी में उसने कहा कि मैं अपनी जान इसलिए दे रहा हूं कि मैंने इस रूप में जन्म लेने का पाप किया है। गौरतलब है कि वेमुला की खुदकुशी के लिए विपक्ष मोदी सरकार के मंत्रियों को जिम्मेदार बताता रहा है।

बीजेपी के युवा सांसद ने अल्पसंख्यकों की दुश्वारियों को भी रेखांकित करते हुए कहा कि देश की आबादी में 17.18 प्रतिशत अल्पसंख्यक हैं, लेकिन इनमें से केवल चार फीसदी लोग उच्च शिक्षा हासिल कर पाते हैं। हमें इन समस्याओं को हल करना है।

किसान खुदकुशी कर रहे और माल्या देश का पैसा लेकर भाग गया

वरुण ने देश में आर्थिक असमानता और कर्ज वसूली में भेदभाव को लेकर कहा कि देश के ज्यादातर किसान चंद हजार रुपये का कर्ज न चुका पाने के चलते जान दे देते हैं, लेकिन विजय माल्या पर सैकड़ों करोड़ रुपये का कर्ज बकाया होने के बावजूद वह एक नोटिस मिलने पर देश छोड़कर भाग गया। उन्होंने देश के बड़े औद्योगिक घरानों पर बकाया कर्ज माफ करने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि अमीरों को रियायत दी जा रही है, जबकि गरीबों की थोड़ी सी संपत्ति को भी निचोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

बढ़ती जीडीपी पर भी बोले वरुण

बीजेपी सांसद ने यह भी कहा कि जीडीपी विकास दर देश की तरक्की का वास्तविक पैमाना नहीं है और इस सूचकांक की वृद्धि पर फूल के कुप्पा होने की जरूरत नहीं है क्योंकि इससे स्वास्थ्य, अशिक्षा और महिलाओं की बेगारी की बुनियादी समस्याओं का हल नहीं मिलता है।

Edited by- Jitendra Nishad

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