मिसाल : कभी होटलों में धोता था कप-प्लेट, आज लाखों युवाओं को सिखाता है English

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पटना। जब मेहनत और किस्मत का मिलन होता है तो बुलंदियों की इबारत अपने आप लिख जाती है।कुछ ऐसा ही British Lingua के संस्थापक बीरबल झा की कहानी है। बीरबल झा के बचपन ने एक ऐसी गरीबी देखी है जिसमें बीरबल झा का बचपन जिम्मेदारियों से दब गया था। जिन हाथों में किताब होनी चाहिए थी उन हाथों ने होटलों की प्लेट पकड़ ली थी। बीरबल झा का कहना है कि उन्हें क्लास 6 तक इंगलिश पढ़ना लिखना तक नहीं जानते थे।

बीरबल झा

बीरबल झा ने लिखी कामयाबी की इबारत

बीरबल झा बिहार के मधुबनी जिले के छोटे से गांव सिजोल के सरकारी स्कूल में प्राइमरी शिक्षा लेने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए 5 किलोमीटर पैदल जाते थे। हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1988 में पटना की तरफ रूख किया। बीरबल पटना पहुंच तो गए लेकिन वहां रहकर पढ़ने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। इसलिए बीरबल ने पहले एक होटल में वेटर का काम किया और फिर कॉलेज में दाखिला लिया और इन्हीं सब के बीच बीरबल ने इंग्लिश पर काफी ध्यान दिया और धीरे धीरे सुधार आ गया।

ग्रेजुएशन पूरा होने के बाद बीरबल ने पटना यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट करने की सोची लेकिन पैसे की कमी के कारण फिर से उन्हें एक चपरासी की नौकरी करनी पड़ी। बीरबल झा कहते हैं कि उन्होंने पीजी के दौरान अपनी इंग्लिश काफी अच्छी कर ली थी। इसी बीच उन्होंने देखा कि उनके कुछ दोस्त ही ठीक से इंग्लिश नहीं बोल पाते हैं, इसलिए उन्होंने तय किया कि अपने दोस्तों को इंग्लिश पढ़ाएंगे. झा बताते हैं कि धीरे-धीरे मुझे लगा कि मेरे दोस्तों के जैसे पटना और पूरे बिहार में कई लोग हैं जिनकी इंग्लिश ठीक नहीं है।

वे इंग्लिश में बात नहीं कर पाते हैं. इस वजह से उनको करियर बनाने में भी दिक्कत होती है। इसलिए मैंने तय किया कि एक संस्थान खोलूं और पहले एडल्ट को इंग्लिश की ट्रेनिंग दूं ताकि उन्हें बेहतर नौकरी मिल सके। इस तरह 1993 में British Lingua की नींव पड़ी। 2000 में हमने इसे कंपनी का रूप दिया।

हमारी मैगजीन Lingua Bulletin को छात्रों ने काफी सराहा और इसके माध्यम से कई लोगों की अंगेजी बेहतर हुई। बीरबल झा का कहना है कि वे छात्रों को इंग्लिश नहीं अंग्रेजी सिखाते हैं। कहते हैं – मेरा मकसद यह नहीं है कि मैं छात्रों को वेस्टर्न बना दूं, बल्कि मैं चाहता हूं कि वे अंग्रेजी जैसी ग्लोबल भाषा को भी सीखें लेकिन, अपनी संस्कृति कभी नहीं भूलें।

इसलिए मैं हमेशा क्लास में भी छात्रों को संस्कारों और परम्परा के बारे में बताता हूं. बीरबल कहते हैं कि आज जब वे अपने छात्रों को देश के बड़े विभागों में बड़े पदों पर काम करते देखते हैं तो उन्हें काफी खुशी होती है। उनका कहना है कि आज उनके द्वारा पढाये गए छात्र लोकसभा, इनकम टैक्स, सेल्स टैक्स, बिहार सरकार, आईटी इंडस्ट्री, शिक्षा जैसे क्षेत्रों में बड़े पदों पर काम कर रहे हैं।

बीरबल झा बिहार के मिथिला संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भी काम करते रहे हैं। उन्होंने मिथिला की शान ‘पाग’ को देश-विदेश में प्रोमोट करने के लिए खास अभियान चला रखा है. उन्होंने पाग को कई बड़े प्लेटफार्म पर भी प्रस्तुत किया है। शिक्षा और संस्कृति में उनके असीम योगदान के लिए वे कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से सम्मानित भी हो चुके हैं।

Edited by- shailendra verma

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