बुंदेलखंड में अब ये क्‍या हुआ कि शादी तक नहीं कर रहे हैं लोग

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झांसी। मौसम की मार झेल रहे बुंदेलखंड के बिगड़े हालात नए नहीं हैं। लेकिन इस बार मुसीबत ज्यादा है। लोगों के पास खाने के लिए अनाज नहीं है। कई इलाकों में पानी खत्म हो चुका है। यहां के लोग नदी-नालों का पानी पीने को मजबूर हैं। चारा नहीं होने से जानवर दम तोड़ रहे हैं। लोग शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। यहां तक कि लोगों की शादी भी पोस्टपोन हो रही है।

बुंदेलखंड

बुंदेलखंड में इस बार तीसरा सूखा

बुंदेलखंड में 1987 से लेकर अब तक 19 सूखे पड़ चुके हैं। इस बार लगातार तीसरा सूखा पड़ा है। पानी की कमी से यहां की जमीनें बंजर हो रही हैं। झांसी के खिसनी बुजुर्ग गांव के 3300 एकड़ रकबे में 100 एकड़ में भी खेती नहीं हुई है। सिलगुआ गांव के ओमप्रकाश कहते हैं कि घरों में न रोटी है, न पानी। लोग गांव-घर छोड़ रहे हैं। सरकार ने घोषणा कर दी है, लेकिन त्‍वरि‍त मदद नहीं पहुंची है।

कर्ज में डूबे लोग

झांसी का जलालपुरा गांव 11 करोड़ रुपए के सरकारी कर्ज में डूबा है। बुंदेलखंड के करीब 14 लाख किसानों पर सरकारी बैंकों का एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का बकाया है। यही कर्ज किसानों की मौत की वजह बन रहा है।

6 साल में 3223 सुसाइड

बुंदेलखंड में पिछले 6 साल में 3223 से अधिक किसानों ने सुसाइड की। इनमें से अधिकतर मामले फांसी लगाकर सुसाइड के हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार बुंदेलखंड में 2009 में 568, 2010 में 583, 2011 में 519, 2012 में 745, 2013 में 750 और 2014 तक 58 किसानों ने सुसाइड की। ये आंकड़े 2009 से हैं, जबकि किसानों की मौत इससे पहले से होती आ रही हैं।

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इस साल हालत ज्यादा खराब

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओलावृष्टि से परेशान मार्च 2015 से जुलाई 2015 तक 350 से अधिक किसानों ने सुसाइड किया। अगस्त-सितंबर 2015 में बारिश नहीं होने पर अब तक 100 से अधिक किसान दुनिया छोड़ चुके हैं।

स्वराज अभियान के संयोजक योगेंद्र यादव के सर्वे के मुताबिक

पिछले एक महीने में एक औसत परिवार ने महीने में सिर्फ 13 दिन ही सब्जी खाई। दाल तो जैसे थाली से गायब हो गई। सामान्य परिवार भी महीने में सिर्फ 4 दिन ही दाल खा रहे हैं। बिल्कुल गरीब परिवार के लोगों ने पूरे महीने में एक बार भी दाल नहीं खाई। कुपोषण और भुखमरी जैसे यह हालात पिछले 8 महीनों में रबी की फसल खराब होने के बाद पैदा हुए हैं। 79 फीसदी परिवार पिछले कुछ महीने में कभी न कभी रोटी या चावल को सिर्फ नमक-चटनी के साथ खाने को मजबूर हुए हैं। एक तिहाई से अधिक परिवारों को खाना मांगना पड़ा। 22 फीसदी बच्चों की पढ़ाई छूट गई। 27 फीसदी को जमीन और 24 फीसदी को जेवर बेचने या गिरवी रखने पड़े हैं।

बुंदेलखंड में इतने लोगों ने घर छोड़ा

– बांदा से सात लाख 37 हजार 920

– चित्रकूट से तीन लाख 44 हजार 801

– महोबा से दो लाख 97 हजार 547

– हमीरपुर से चार लाख 17 हजार 489

– उरई (जालौन) से पांच लाख 38 हजार 147

– झांसी से पांच लाख 58 हजार 377

– ललितपुर से तीन लाख 81 हजार 316

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सरकार ने की है मदद की घोषणा

सरकार ने किसानों को मदद की घोषणा की है। झांसी में जॉब कार्ड धारकों की संख्या बढ़ाकर एक लाख 70 हजार कर दी गई है। लोगों को रोजगार मुहैया कराया जा रहा है। सस्ते राशन के लिए पात्र लोगों को तलाशा जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में 15 से 18 घंटे बिजली देने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश सरकार फौरी तौर पर मदद के लिए 100 करोड़ का एलान कर चुकी है।

सीडीओ संजय कुमार के अनुसार

53 गांवों को चिन्हित किया गया है, जहां जल संकट अधिक है। सरकार को 400 नए हैंडपंप लगाने को प्रस्ताव भेजा गया है। नए टैंकर मंगाए जा रहे हैं, जिससे गांव में पानी भेजा जा सके। पशुओं के लिए की जा रही है व्यवस्था। पशुओं के लिए प्रत्येक ब्लाक में 2-2 आश्रय केंद्र भी खोले जा रहे हैं। यहां पशुओं के चारे और पानी का इंतजाम होगा। इसके लिए झांसी सहित बुंदेलखंड के हर जिले को एक-एक करोड़ दिए गए हैं।

 

(दैनिक भास्‍कर से साभार)

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